इंसान के इल्म के लिये इतना ही काफ़ी है , कि वह ख़ुदा की इबादत करे , और जिहालत के लिये इतना ही काफ़ी है , कि वह अपनी राय पर ख़ुशहाल हो जाए ।
बेशक , आलिम आदमी वह है , जो अपने इल्म के अनुसार काम करता है , भले ही उस का काम थोड़ा क्यों न हो ।