इल्म से इंसान को निर्धन है, तो समृद्धि , कंजूस है , तो सहृदयता , अगर तुच्छ है , तो हैबत , यदि रोगी है , तो स्वास्थ्य , यदि दूर है , तो निकटता , यदि बद - तमीज़ है , तो शर्म व हया , यदि नीचा है , तो उच्चता , यदि हक़ीर है , तो शराफ़त प्राप्त होती है , और हिकमत व महानता , बुद्धिमान को भी इल्म ही से प्राप्त होती है , इस लिये , भाग्यशाली है वह आदमी , जो आलिम व बुद्धिमान है ।

20 मई 2014 - 18:09

رسول اللّہۖ: أمَّا العِلمُ، فَیَتَشَعَّبُ مِنہُ الغِنیٰ و ان کانَ فَقیرًا، والجودُ و ان کانَ بَخیلاً، و المَھابَةُ ون کانَ ھَیَّنًا، والسَّلامَةُ وان کانَ سَقیمًا، و القُربُ و ان کانَ قَصِیًّا، والحَیاءُ و ان کانَ صَلِفًا، و الرِّفعَةُ و ان کانَ وَضیعًا، والشَّرَفُ و ان کانَ رَذلاً، و الحِکمَةُ، و الحُظوَةُ، فَھٰذا ما یَتَشَعَّبُ لِلعاقِلِ بِعِلمِہِ۔ فَطوبیٰ لِمَن عَقَلَ وَعَلِمَ

रसूले - ख़ुदा ( सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही वसल्लम ) : इल्म से इंसान को निर्धन है, तो समृद्धि , कंजूस है , तो सहृदयता , अगर तुच्छ है , तो हैबत , यदि रोगी है , तो स्वास्थ्य , यदि दूर है , तो निकटता , यदि बद - तमीज़ है , तो शर्म व हया , यदि नीचा है , तो उच्चता , यदि हक़ीर है , तो शराफ़त प्राप्त होती है , और हिकमत व महानता , बुद्धिमान को भी इल्म ही से प्राप्त होती है , इस लिये , भाग्यशाली है वह आदमी , जो आलिम व बुद्धिमान है ।