मोहन भागवत ने हैदराबाद में एक कार्यक्रम के दौरान अपने भाषण में कहा कि आरएसएस की नज़र में भारत की 130 करोड़ की आबादी हिंदू है। उन्होंने कहा कि भारत में लोगों की संस्कृति और धर्म चाहे जो भी, वे हिंदू ही हैं। भागवत ने कहा कि जो राष्ट्रवादी हैं और जो भारतीय संस्कृति का सम्मान करते हैं, वे सब हिंदू हैं। आरएसएस के सरसंघ चालक ने कहा कि सभी समाज हमारे हैं और संघ सबको एक करना चाहता है। भागवत ने कहा कि भारत, परंपरा से हिंदुत्ववादी है। उन्होंने अपने भाषण में ब्रिटिश राज और उसके फूट डालो और राज करो की नीति का भी उल्लेख किया और रवीन्द्र नाथ टैगोर की वह बात भी दोहराई जिसमें उन्होंने हिंदुओं और मुसलमानों के बीच एकता पर बल दिया था और कहा था कि भारतीय समाज का स्वभाव एकता की ओर बढ़ना है।
मोहन भागवत ने कहा कि हिंदुओं और मुसलमानों के बीच कुछ अंतर्निहित विरोधाभासों के बावजूद हिंदू समाज राष्ट्र को एकजुट करने के लिए हिंदू तरीक़े से समाधान खोजने में सक्षम है। आरएसएस प्रमुख ने कहा कि भारत में पैदा होने वाला प्रत्येक व्यक्ति हिंदू है। लोग अलग-अलग धर्मों का पालन कर रहे हैं लेकिन वे सभी भारतीय हैं और भारत माता की संतान हैं।