सूरए ताहा की आयत क्रमांक 80 का अनुवादः
हे बनी इस्राईल! निश्चय ही हमने तुम्हें तुम्हारे शत्रु से मुक्ति दिलाई और तुमसे तूर के दाहिने छोर का वादा किया और तुम पर मन्न और सलवा (जैसे भोजन) उतारे।
संक्षिप्त टिप्पणी:
जब यह जाति मरुस्थल में भटक रही थी जहां उसे उचित आहार प्राप्त नहीं हो रहा था तो ईश्वर ने निकटवर्ती पर्वत से उसे मधु उपलब्ध कराया और छोटे-छोटे पक्षियों को जिनका मांस अत्यंत स्वादिष्ट था उनके पास भेजा ताकि वे उनके मांस को भोजन के रूप में प्रयोग करें।
इस आयत से मिलने वाले पाठ:
- स्वाधीनता व स्वतंत्रता उन महान अनुकंपाओं में से हैं जिन्हें सदैव याद रखना चाहिए और उनके मूल्य को समझना चाहिए।
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पैग़म्बरों का दायित्व है कि वे लोगों का मार्गदर्शन करें किंतु सबसे पहले अत्याचारी शासकों के चंगुल से उनकी स्वतंत्रता का मार्ग प्रशस्त होना चाहिए।
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ईश्वर आध्यात्मिक अनुकंपाओं की ओर भी संकेत करता है और भौतिक अनुकंपाओं की ओर भी किंतु आध्यात्मिक मामलों को प्राथमिकता प्राप्त है।