मुसलमानों के साथ भेदभाव करने वाले और देश के लोकतांत्रिक ढांचे के लिए ख़तरा माने जाने वाले इस क़ानून के ख़िलाफ़ पूरे देश में विरोध प्रदर्शन जारी हैं।
जामिया मिल्लिया इस्लामिया और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालयों में छात्रों के ख़िलाफ़ पुलिस की बर्बरता के बाद, यह प्रदर्शन हिंसक हो गए हैं और जहां दो दर्जन के क़रीब लोगों की जान चली गई है, वहीं सैकड़ों ज़ख़्मी हैं।
टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक़, बच्चे की जब मौत हुई तो उस वक़्त वह अपने दोस्तों के साथ खेल रहा था, पुलिस के हमले से बचने के लिए प्रदर्शनकारी जब अपनी जान बचाने के लिए भागे तो यह बच्चा उनकी चपेट में आ गया।
कुछ चश्मदीद गवाहों का दावा है कि लड़के की मौत पुलिस के बर्बरता और हमले के कारण हुई है।
इसके अलावा, पुलिस के लाठी डंडो से लहूलहान होकर ज़ख़्मी होने वाले कई बच्चों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रही हैं।
वहीं असम स्टूडेंट यूनियन के मुख्य सलाहकार समुज्जल भट्टाचार्य ने कहा है कि जनता की आवाज़ तेज़ और साफ़ है। इस क़ानून की विदाई होनी चाहिए।
इस बीच, दिल्ली वक़्फ़ बोर्ड ने विरोध प्रदर्शनों के दौरान मरने वालों के परिजनों को 5.5 लाख रुपये मुआवज़ा देने का एलान किया है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक़, विरोध प्रदर्शनों के दौरान मरने वालों की अधिकांश संख्या का संबंध उन राज्यों से है, जहां भारतीय जनता पार्टी की सरकार है।
विरोध प्रदर्शनों में बड़ी मुसलमानों के अलावा, बड़ी संख्या में दलित और हिंदू भी भाग ले रहे हैं और कुछ लोगों की कोशिशों के बावजूद, इन्हें साम्प्रदायिक रंग नहीं दिया जा सका है।
इस दौरान, भारतीय जनता पार्टी के कुछ नेता लगातार उकसाने वाले बयान दे रहे हैं, जबकि बीजेपी गठबंधन के कई नेता इसे एक मुर्दा क़ानून बता रहे हैं।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पुलिस पर आरोप है कि वह लोगों के घरों में घुसकर तोड़फोड़ कर रही है और लोगों डरा धमका रही है।