प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक़, भारत के शिया धर्मगुरुओं की राष्ट्रीय परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष और इमामे जुमा कश्मीरी गेट दिल्ली मौलाना मोहसिन तक़वी ने पत्रकारों से वार्ता करते हुए कहा कि एनआरसी और विवादित नागरिक संशोधन क़ानून भारत के लोगों को बांटने वाला क़ानून है। मौलाना तक़वी ने कहा कि यह विवादित क़ानून देश की सुरक्षा और शांति के लिए भी गंभीर ख़तरा है। उन्होंने भारत की मोदी सरकार से मांग की है कि वह इस विवादित और असंवैधानिक क़ानून को वापस लें। मौलाना मोहसिन तक़वी ने भारत सरकार से अपील भी कि, कि देश में ऐसे क़ानून न बनाए जाएं जो देश की अखंडता और सहिष्णुता को नुक़सान पहुंचा सकते हैं।
इस मौक़े भारत के प्रसिद्ध धर्मगुरू मौलाना सैयद जलाल नक़वी ने भी धार्मिक भेदभाव पर आधारित इस अधिनियम की निंदा करते हुए कहा कि भारत सरकार को इस माहान देश की जनता को धर्म के आधार पर बांटने से बचना चाहिए और इस देश के आम नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं होना चाहिए।
दूसरी ओर भारत के एतिहासिक शहर लखनऊ में भी बुधवार को छात्रों द्वारा ज़बरदस्त प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रहे छात्र नेता मोहम्मद एबाद ने भारत की मोदी सरकार पर देश में धर्म के नाम पर नफ़रत का ज़हर घोलने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पूरा देश इस समय एनआरसी और सीएए के ख़िलाफ़ सड़कों पर है पर भारत सरकार को इस बात से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता है क्योंकि वह देश की जनता की चुनी हुई सरकार है ही नहीं बल्कि ईवीएम में की गई चोरी से बनी सरकार है। मोहम्मद एबाद ने कहा कि अगर देश की जनता की चुनी सरकार होती तो अपने देशवासियों पर और विशेषकर छात्रों पर इतना अत्याचार नहीं कर रही होती।
इस बीच लखनऊ में ही देर शाम सैकड़ों की संख्या में युवाओं ने इस शहर के एतिहासिक छोटे इमामबाड़े के बाहर एकत्रित होकर भारत की मोदी सरकार द्वारा सीएए और एनआरसी जैसे विवादित क़ानून लाने और जामिया मिल्लिया और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के छात्र एवं छात्राओं पर पुलिस द्वारा किए गए अत्याचार के विरुद्ध ज़ोरदार विरोध-प्रदर्शन किया। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा हर तरह के विरोध प्रदर्शन पर लगी रोक के बावजूद इस शांतिपूर्ण प्रदर्शन में सैकड़ों की संख्या में युवा शामिल हुए। युवाओं ने शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन किया और भारत सरकार से मांग कि, कि सीएए और एनआरसी जैसे विवादित क़ानून को जितनी जल्दी हो सके वापस लिया जाए। युवाओं का कहना था कि हम देश का भविष्य हैं और हम नहीं चाहते कि आज के नेता अपनी सत्ता और अपने स्वार्थ के लिए इस देश में नफ़रत की बीच बो दें। प्रदर्शनकारी युवाओं का कहना था कि भारत की गंगा-जमुनी तहज़ीब की रक्षा करना हमारा कर्तव्य है और हम मोदी सरकार द्वारा नफ़रत से भरे इस विवादित क़ानून का विरोध भी इसीलिए कर रहे हैं।