28 नवंबर 2019 - 18:44
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मशहूर अरबी समाचारपत्र रायुल यौम ने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस के संयुक्त अरब इमारात के अचानक व अप्रत्याशित दौरे के कारणों की समीक्षा की है।

अलअरबिया टीवी चैनल ने मंगलवार की शाम एक ब्रेकिंग न्यूज़ मे बताया कि सऊदी अरब के युवराज मुहम्मद बिन सलमान एक औचक दौरे पर अबू धाबी जा रहे हैं। चैनल ने इस दौरे में दोनों देशों के बीच वार्ता के विषयों या दौरे के वास्तविक कारणों की तरफ़ कोई संकेत नहीं किया। मशहूर अरबी समाचारपत्र रायुल यौम ने फ़ार्स की खाड़ी के तटवर्ती देशों में अपने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि सऊदी अरब के युवराज मुहम्मद बिन सलमान, अबू धाबी में अपने समकक्ष मुहम्मद बिन ज़ायद से कई विषयों पर बात करने वाले हैं जिनमें सबसे अहम दोनों देशों के संबंधों को बेहतर बनाना है जिनमें हालिया दिनों में विभिन्न मतभेदों के कारण खटास आ गई है।

 

इन सूत्रों का कहना है कि सऊदी अरब और संयुक्त अरब इमारात के बीच सबसे बड़ा मतभेद, यमन युद्ध की समाप्ति और क़तर से संबंध बहाली को लेकर है। अरब सूत्रों के अनुसार मुहम्मद बिन सलमान और मुहम्मद बिन ज़ायद के बीच वार्ता का एक अन्य अहम विषय मिस्र से सऊदी अरब के संबंधों के बारे में है जिनमें इन दिनों काफ़ी तनाव दिखाई दे रहा है। मिस्र के राष्ट्रपति अब्दुल फ़त्ताह अस्सीसी ने पिछले रमज़ान के महीने में रियाज़ में आयोजित होने वाले अरब राष्ट्राध्यक्षों के सम्मेलन में भाग नहीं लिया था जबकि पिछले हफ़्ते वे अचानक ही अबू धाबी पहुंच गए थे। उनकी इस यात्रा के परिणाम में संयुक्त अरब इमारात ने मिस्र में पूंजी निवेश के फ़ंड के लिए बीस अरब डाॅलर विशेष कर दिए।

 

अरब सूत्रों का यह भी कहना है कि संयुक्त अरब इमारात, इस बात को लेकर नाराज़ है कि सऊदी अरब ने इमारात को शामिल किए बिना ही यमन युद्ध की समाप्ति के अंतिम मार्ग की समीक्षा के लिए सनआ के साथ वार्ता का द्वारा खोल दिया है। रायुल यौम का कहना है कि बिन सलमान की इस यात्रा के लिए, इमारात के युवराज के सौतेले भाई शैख़ सुलतान बिन ज़ायद की मौत के बाद उन्हें श्रद्धांजली अर्पित करने जैसा कोई बहाना बना दिया जाए लेकिन उनकी इस यात्रा की सफलता व विफलता की कसौटी यह है कि उपरोक्त बिंदुओं के बारे में दोनों पक्षों का व्यवहार कैसा रहता है। एक अन्य बिंदु जिस पर पर्दा डाल दिया गया है, वह यह है कि सऊदी अरब, संयुक्त अरब इमारात के बड़े बैंकों, कंपनियों व धनवान लोगों को आरामको तेल कंपनी के शेयर ख़रीदने और उसमें अरब डाॅलर का पूंजी निवेश करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है ताकि सऊदी अरब के कैश फ़्लो में कमी न आने पाए क्योंकि संभव है कि जारी वर्ष के अंत तक सऊदी अरब में बजट का घाटा 60 अरब डाॅलर तक पहुंच जाए।

 

आरंभिक रिपोर्टों से पता चलता है कि संयुक्त अरब इमारात, डेढ़ अरब डाॅलर निवेश के लिए विशेष करना चाहता है लेकिन यह राशि, अपेक्षा से बहुत कम है और फिर इस बात की औपचारिक रूप से पुष्टि भी नहीं हुई है। इस प्रकार की बातें भी सामने आ रही हैं कि बिन सलमान, अबू धाबी के बाद क़ाहेरा भी जा सकते हैं। इसके लिए भी यही शर्त है कि शैख़ मुहम्मद बिन ज़ायद, सऊदी अरब और मिस्र के संबंधों में जमने वाली बर्फ़ को पिघलाने की कोशिश करें या फिर वे स्वयं क़ाहेरा की यात्रा करें और दोनों देशों के बीच पैदा होने वाली दरार को भरने का प्रयास करें। यह बात भी ध्यान योग्य है कि बिन सलमान ने अबू धाबी का दौरा उस समय शुरू किया जब उससे कुछ ही घंटे पहले उन्होंने अमरीका के चीफ़ आफ़ आर्मी स्टाफ़ जनरल मार्क मिली से रियाज़ में मुलाक़ात की थी।