16 नवंबर 2019 - 11:37
आयत क्या कहती है? ईश्वर का इरादा हर बात पर वर्चस्व रखता है।

ये सभी कार्य हमारी इच्छा से हुए जो इस बात का चिन्ह थे कि हमने तुम पर उपकार किया और तुम्हारी जान की रक्षा की।

सूरए ताहा की आयत क्रमांक 37, 38 और 39 का अनुवादः

और (हे मूसा!) हम तुम पर एक बार और भी उपकार कर चुके हैं। जब हमने तुम्हारी माँ के दिल में वह बात डाली जो डाली जानी चाहिए थी, कि बच्चे को सन्दूक़ में रख दे, फिर उसे (नील) नदी में डाल दे ताकि नदी उसे तट पर डाल दे और उसे मेरा शत्रु और उसका शत्रु उठा ले। मैंने अपनी ओर से तुम पर अपना प्रेम डाला। (ताकि शत्रु भी तुमसे प्रेम करे) और ताकि मेरी आँख के सामने तुम्हारा पालन-पोषण हो।

 

संक्षिप्त टिप्पणी:

जब उसने सभी नवजात शिशुओं की हत्या का आदेश दे रखा था तब हमने तुम्हारी माता के मन में यह बात डाली कि वे तुम्हें एक संदूक़ में रख कर नील नदी में डाल दें।

 

इन आयतों से मिलने वाले पाठ:

  1. ईश्वर का इरादा हर बात पर वर्चस्व रखता है, जैसे कि फ़िरऔन चाहता था कि हज़रत मूसा का जन्म न हो किंतु ईश्वर ने उन्हें फ़िरऔन के घर में ही पाला।

  2. ईश्वर की एक परंपरा यह है कि वह अपने प्रिय बंदों का प्रेम लोगों के हृदय में डाल देता है।