3 नवंबर 2019 - 12:28
आयत क्या कहती है? प्रलय आने का समय से केवल ईश्वर ही अवगत है।

उसका आना निश्चित है और सभी मनुष्यों को प्रलय में अपने कर्मों का हिसाब-किताब देना होगा।

सूरए ताहा की आयत क्रमांक 15 और 16 का अनुवादः

(हे मूसाः) निश्चित रूप से प्रलय, जिसके समय को मैंने गुप्त रखा है, आने वाला है ताकि जिसने जो कुछ प्रयास किया है, उसे उसका प्रतिफल दिया जाए। तो (सावधान रहो कि) वह व्यक्ति तुम्हें प्रलय की ओर से निश्चेत न कर दे जो उस पर विश्वास नहीं रखता और केवल अपनी आंतरिक इच्छाओं का पालन करता है कि इस स्थिति में तुम तबाह हो जाओगे।

 

संक्षिप्त टिप्पणी:

ईश्वर सभी को प्रलय में उपस्थित करेगा ताकि हर व्यक्ति को उसके कर्मों का फल दिया जा सके।

 

इन आयतों से मिलने वाले पाठ:

  1. यद्यपि प्रलय आने का समय गुप्त है किंतु उसका आना निश्चित है।

  2. प्रलय के इन्कार का कारण, आंतरिक इच्छाओं का पालन है।

  3. कुछ लोग अपनी अवैध इच्छाओं की पूर्ति के मार्ग में स्वयं को स्वतंत्र समझने और प्रलय में कर्मों के हिसाब-किताब की चिंता से बचने के लिए प्रलय का ही इन्कार कर देते हैं।

  4. ईमान वालों को अपनी आस्थाओं पर सुदृढ़ रहना चाहिए और जान लेना चाहिक कि धर्म की रक्षा में किसी भी प्रकार की ढिलाई से वे तबाह हो जाएंगे और उनका अंत बुरा होगा।