सूरए ताहा की आयत क्रमांक 7 और 8 का अनुवादः
और यदि बात को ऊंची आवाज़ से स्पष्ट करो (या उसे छिपाए रखो, दोनों ईश्वर के लिए एकसमान है) कि वह लोगों के रहस्यों से और उस बात से, जो अधिक छिपी हुई है, अवगत है। ईश्वर के अतिरिक्त कोई अन्य पूज्य नहीं है और सभी अच्छे नाम (और गुण) उसी के लिए विशेष हैं।
संक्षिप्त टिप्पणी:
न केवल स्पष्ट रूप से कही गई बातों से, जिन्हें सभी समझते हैं बल्कि हर व्यक्ति की गुप्त बातों से जो उसके रहस्यों में शामिल होती हैं, ईश्वर पूर्ण रूप से अवगत है।
इन आयतों से मिलने वाले पाठ:
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मनुष्य की प्रकट व गुप्त बातों के संबंध में ईश्वर के व्यापक एवं गहन ज्ञान पर ध्यान, मनुष्य को बुराइयों और पापों से रोकता है।
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उपासना के योग्य वही है जिसमें सभी अच्छी विशेषताएं व गुण एकत्रित हों और वह हर प्रकार की बुराई से दूर हो।