पिछले हफ़्ते पूर्वोत्तरी सीरिया पर सैन्य हमला करने के अंकारा के फ़ैसले के बाद, तुर्की पर इस समय नेटो के सदस्य देशों जर्मनी, फ़्रांस और ब्रिटेन की ओर से कूटनैतिक और आर्थिक दबाव पड़ रहा है।
योरोपीय देश तुर्की के ख़िलाफ़ जिसे वह आतंकियों के ख़िलाफ़ वैध अभियान कहता है, हथियारों की पाबंदी सहित दूसरी पाबंदियां लगाने की बात कर रहे हैं।
सोमवार को अर्दोग़ान ने पत्रकारों से बातचीत में नेटो के सदस्य देशों की ओर से समर्थन न मिलने की आलोचना करते हुए कहा थाः नेटो संधि के पांचवे अनुच्छेद के मुताबिक़, उन्हें हमारा साथ देना चाहिए। अर्दोग़ान का इशारा नेटो संधि के उस मुख्य बिन्दु की ओर था जिसमें कहा गया है कि किसी एक सदस्य पर हमला सब पर हमले जैसा है।
अर्दोग़ान को लगता है कि योरोपीय नेताओं को अंकारा की ओर से की जा रही कार्यवाही के बारे में ग़लत सूचनाएं हैं। तुर्क राष्ट्रपति ने कहाः "खेद की बात है कि उन्हें बहुत सी बातें नहीं मालूम हैं और वे बहुत ही ग़लत सूचनाओं के दबाव में हैं।"