ब्रिगेडियर जनरल हुसैन सलामी ने कहा कि जब दुश्मनों ने इस्लाम को सामाजिक व राजनैतिक मंच से हटा दिया था तब इमाम ख़ुमैनी ने इस्लामी क्रांति के माध्यम से इस्लामी प्रतिष्ठा को एक नया उदय प्रदान किया और असत्य का मोर्चा उसके सामने नहीं टिक सका। उन्होंने कहा कि ईरान की इस्लामी क्रांति की आधारशिला सच्चाई के वर्चस्व के आधार पर रखी गई थी और जब इमाम ख़ुमैनी ने समाज में इस्लाम को मज़बूत बना दिया तब कोई भी यह नहीं सोच सकता था कि ख़ाली हाथों से भी साम्राज्य और अत्याचार का मुक़ाबला किया जा सकता है।
आईआरजीसी के कमांडर इनचीफ़ ने कहा कि अमरीकी अब ऐसी स्थिति में पहुंच चुके हैं कि जो कुछ भी और जितना भी वे ख़र्च करते हैं, उन्हें वांछित नतीजा हासिल नहीं होता और यह उनके पतन को ज़ाहिर करता है। उन्होंने कहा कि अमरीकियों की समस्या यह है कि वे आर्थिक व सामरिक मैदानों में किए जाने वाले इन बड़े बड़े ख़र्चों को राजनैतिक लाभों में नहीं बदल पा रहे हैं। ब्रिगेडियर जनरल हुसैन सलामी ने कहा कि आज हम व्यवहारिक मैदान में आ गए हैं और अमरीका हमारी ठोस कार्यवाहियों के सामने विफल हो चुका है। उन्होंने कहा कि आज ईरान की ताक़त इस हद को पहुंच चुकी है कि वह जहां ही क़दम रखता है, दुश्मन तेज़ी से पीछे हट जाता है और अमरीका के दोस्त, जो सऊदी और इस्राईली हैं, अमरीका की ओर से निराश हो चुके हैं और जानते हैं कि कड़े दिनों में अमरीका से मदद की आशा नहीं रखी जा सकती।