6 अक्टूबर 2019 - 13:21
क्या इराक़ में हंगामे, आरामको पर हमले का सऊदी- अमरीकी बदला हैं? फिलिस्तीनी विश्लेषक के विचार ‍और अहम सवाल, पढ़ें...

यह बिल्कुल सही बात है कि इराक़ी जनता जिन समस्याओं का सामना कर रही है वह इस देश के संसाधनों पर ध्यान देने के बाद आश्चर्यजनक है। इन संसाधनों अलावा स्वंय इराक़ी जनता भी काफी योग्य और सक्षम है लेकिन इन सब के बावजूद दशकों से इराक़ी जनता सुख सुविधा से दूर है इस लिए इस की मांग करना और सड़कों पर निकलना उनका अधिकार है लेकिन आज कल जो कुछ इराक़ में हो रहा है उसे पूरी तरह इन चीज़ों का परिणाम नहीं कहा जा सकता है और इसके कई कारण हैं।

    यहां पर हम प्रदर्शनकारियों को संदिग्ध नहीं कह रहे हैं बल्कि हमारा कहने का आशय यह है कि प्रदर्शनों के दौरान जिस तरह के नारे लगाए गये और जो शैली अपनायी गयी उसने इन प्रदर्शनों को पूरी तरह से उनके रास्ते से भटका दिया। हमें प्रदर्शनों के दौरान बहुत ज़्यादा हिंसा नज़र आयी जिसकी वजह से हालात, विस्फोटक हो गये, प्रदर्शनकारियों की हिंसा से सुरक्षा बलों में आक्रोश बढ़ा और सुरक्षा बलों की हिंसा से प्रदर्शनकारियों में हिंसा बढ़ा तो सवाल यह है कि वास्तव में हिंसा किस की तरफ से है? प्रदर्शनों में हिंसा पर ध्यान देने से पता चलता है कि प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के अलावा भी कुछ लोग हैं जो आग में घी डालने का काम कर रहे हैं और उनका मक़सद स्थिति को विस्फोटक बनाना है।

     इसके  साथ ही ध्यान देने की एक अन्य बात यह है कि इन प्रदर्शनों के नारों में ईरान, उसके घटकों, इराक़ के वरिष्ठ धार्मिक नेतृत्व और स्वंय सेवी बलों को निशाना बनाया जा रहा है हालांकि इसी स्वंय सेवी बल ने और ईरान के पूरे समर्थन की मदद से आतंकवादी संगठन दाइश को इराक़ से उखाड़ फेंका और इराक़ पर क़ब्ज़े के उसके सपने को चकनाचूर कर दिया।

 

     इस लिए हमें यह लगता है कि कुछ ताक़तें हैं जो इराक़ में ईरान और इलाक़े में उसके घटकों को नुक़सान पहुचांने की कोशिश कर रही हैं। तो अगर यह विचार सही हो तो फिर अमरीका और उसके क्षेत्रीय घटक खास तौर पर सऊदी अरब के अलावा किसी और ताक़त का विचार मन में नहीं आता क्योंकि ईरान, इराक़ के वरिष्ठ धार्मिक नेतृत्व और इराक़ के स्वंय सेवी बल ने इनकी ही योजनाओं पर पानी फेरा है और अब उन्हीं को प्रदर्शनों में निशाना बनाया जा रहा है।

     दर अस्ल सऊदी अरब में ईरान का खुले मैदान में मुक़ाबला करने की ताक़त नहीं है और उसका सब से बड़ा घटक अमरीका भी ईरान से टकराव से बचता है तो फिर सऊदी अरब ने शायद फिलहाल इराक़ में ही ईरान के  प्रभाव को सीमित करने पर संतोष करने का इरादा किया हो इस लिए हमारी दुआ है कि इराक़ और उसकी जनता, दुश्मनों की साज़िशों से सुरक्षित रहे।