मोहम्मद अली अलहूसी ने तुर्क दैनिक गज़ेटेडुवर से शनिवार को इंटरव्यू में यह बात कही।
उन्होंने कहा कि यमन के ख़िलाफ़ सऊदी अरब का हमला इस वजह से जारी है क्योंकि उसे अमरीका, इस्राईल, ब्रिटेन और फ़्रांस का समर्थन हासिल है, इसलिए जब तक अमरीका, इस्राईल, ब्रिटेन और फ़्रांस की ओर से हमलावरों का समर्थन नहीं रुकता उस समय तक यमन के ख़िलाफ़ हमला ख़त्म नहीं होगा।
मोहम्मद अली अलहूसी ने कहा कि यमनी सेना आत्मरक्षा के लिए लड़ रही है। उन्होंने इसी के साथ बल दिया कि यमन की सर्वोच्च राजनैतिक कमेटी शांति की हर कोशिश का स्वागत करती है। उन्होंने सऊदी अरब की अगुवाई में यमन की नाकाबंदी को युद्ध अपराध क़रार दिया जिसकी वजह से इस देश में अब तक का सबसे बुरा मानवीय संकट पैदा हो गया है।
मोहम्मद अली अलहूसी ने अंसारुल्लाह आंदोलन की ओर से संकट के हल के लिए संघर्ष विराम के लिए की गयी पेशकश का उल्लेख करते हुए, चेतावनी दी कि अगर सऊदी अरब ने इस योजना को क़ुबूल न किया तो वह घातक नुक़सान के लिए तय्यार रहे।(