2 अक्टूबर 2019 - 13:41
जनरल क़ासिम सुलैमानीः ...हमें यह महसूस हुआ कि सैयद हसन नसरुल्लाह के लिए यहां गंभीर ख़तरा है, हमने सैयद को वहां से हटाने का फ़ैसल

जनरल क़ासिम सुलैमानी की ज़बान से सुनिए उस रात क्या हुआ था जब 2006 में लेबनान पर इस्राईल भीषण बमबारी कर रहा था।

हिज़्बुल्लाह ने (बैरूत के इलाक़े दक्षिणी) ज़ाहिया में एक आप्रेशन रूप बनाया था इसके आस पास की इमारतों पर लगातार बमबारी हो रही थी और वह गिर रही थीं। यानी हर रात दो तीन बड़ी इमरतें बारह मंज़िला, तेरह मंज़िला, इससे नीची या ऊंची  इमारतें धाराशायी हो रही थीं मिट्टी के ढेर में बदल जा रही थीं। आपरेशन रूम भूमिगत रूम नहीं था बल्कि एक आम आप्रेशन रूम था लेकिन वहां कुछ उपकरण और संपर्क के यंत्र रखे गए थे। एक रात जब हम इस आप्रेशन रूम में थे, युद्ध का संचालन करने वाले लगभग सारे अधिकारी उस रूम में मौजूद थे। रात के लगभग ग्यारह बजे थे।

जब आसपास की इमारतों को (इस्राईलियों ने) ध्वस्त कर दिया तो हमें यह महसूस हुआ कि सैयद (हसन नसरुल्लाह) के लिए यहां गंभीर ख़तरा है। हमने सैयद को वहां से हटाने का फ़ैसला किया। मैंने और एमाद (मुग़निया) ने आपस में मशविरा किया। सैयद वहां से जाने के लिए बड़ी मुश्किल से तैयार हुए। वहां से निकलने का मतलब यह नहीं था कि इस इलाक़े से बाहर जाना था बस उस इमारत से निकलना था जिसके बारे में हम लग रहा था कि दुशमन इस पर हमला कर सकता है क्योंकि इस इमारत में आवाजाही ज़्यादा थी, इसलिए हमने उनको किसी और इमारत में ले जाना चाहा।

एमके विमान यानी इस्राईल के ड्रोन विमान लगातार ज़ाहिया के इलाक़े पर उड़ानें भर रहे थे, तीन तीन विमान उड़ते थे और हर आने जाने वाले पर पूरी नज़र रखते थे। वहां से गुज़रने वाली मोटरसाइल को भी वह नज़रअंदाज़ नहीं करते थे। रात के बारह बज गए और ज़ाहिया के इलाक़े में चारों ओर सन्नाटा पसरा हुआ था मनो यह कोई निर्जन इलाक़ा हो। हमने यह तय किया कि इस जगह से हमें दूसरी इमारत में जाना है। इन दोनों इमारतों के बीच ज़्यादा दूरी नहीं थी। हम जब वहां पहुंचे तो इमारत के भीतर दाख़िल होते ही बमबारी शुरू हो गई और इस इमारत के बग़ल वाली इमारत पर बम गिराए गए। हम उसी इमारत में रुके रहे क्योंकि वहां हमारे पास एक सुरक्षित संपर्क लाइन थी और यह ज़रूरी था कि उस समय सैयद विशेष रूप से इमाद का संपर्क टूटे। इसके बाद फिर बमबारी हुई और इसी इमारत के क़रीब एक पुल को ध्वस्त कर दिया। यह महसूस हुआ कि जब दो बार बमबारी हो चुकी है तो तीसरी बार संभव है कि इसी इमारत को निशाना बनाया जाए। उस इमारत में केवल तीन लोग थे मैं, सैयद और एमाद। इसलिए हमने सोचा कि इस इमारत से बाहर निकलना चाहिए।

हम एक अन्य इमारत की ओर गए। हम बाहर निकले। हम तीन लोग थे हमारे पास कोई गाड़ी नहीं थी। ज़ाहिया के इलाक़ा अंधेरे और सन्नाटे में डूबा हुआ था। ज़ाहिया के इलाक़े के ऊपर उड़ते इस्राईली विमानों की आवाज़ सुनाई देती थी। एमाद ने मुझसे और सैयद से कहा कि आप लोगो इस पेड़ के नीचे बैठ जाइए ताकि ऊपर से आपको देखा न जा सके। हालांकि पेड़ भी देखे जाने से बचा नहीं सकता था क्योंकि एमके ड्रोन विमानों की ख़ास बात यह है कि शरीर की गर्मी और अन्य चीज़ की गर्मी के अंतर को भी समझ लेता है। इसलिए वह जगह छिपने के लिए सुरक्षित नहीं थी।

एमाद गए उन्हें एक गाड़ी मिल गई। कुछ मिनट ही गुज़रे थे कि वह तेज़ी से वापस आए। एमाद वाक़ई बेमिसाल था। ख़ास तौर पर स्ट्रैटेजी बनाने में। गाड़ी जब हमारे पास पहुंची तो उससे पहले तक एमके ड्रोन हमारे ऊपर केन्द्रित थी। जब गाड़ी हमारे पास पहुंची तो अब ड्रोन उस गाड़ी पर केन्द्रित हो गया। आज जानते हैं कि एमके ड्रोन का कैमरा जानकारियां लगातार तेल अबीब भेज रहा था और वह अपने आप्रेशन रूप में बैठकर इस दृष्य को देख रहे थे। थोड़ी देर लगी जिसके दौरान हम बेसमेंट में चले गए और वहां से एक अन्य बेसमेंट में पहुंचने के बाद हम इस गाड़ी से उतर कर एक अन्य चीज़ में बैठ गए जिसके बारे में मैं अभी नहीं बता सकता। इस तरह हमने दुशमन को डाज दिया। रात के दो बजे हम अगले आप्रेशन रूम में पहुंच गए।