इससे पहले 14 सितम्बर को अंसारुल्लाह ने सऊदी अरब के सबसे बड़े तेल प्रतिष्ठानों पर हवाई हमला करके उसका तेल उत्पादन आधा कर दिया था। यह हमला भी इतना व्यापक था कि अरबों डॉलर के नुक़ासन के अलावा अबक़ीक़ और अल-ख़ुरैस तेल रिफ़ाइनरियों की मरम्मत में महीनों लग जायेंगे।
सऊदी अरब और अमरीका ने इस हमले का आरोप ईरान पर मढ़ दिया था, लेकिन तेहरान ने इन आरोपों को निराधार और यमन पर हमलावर देशों की युद्ध के मैदान में कमज़ोरी को छुपाने की एक कोशिश क़रार दिया था।
अंसारुल्लाह ने इस हमले के बाद सऊदी अरब को युद्ध विराम का संदेश देते हुए अपने जवाबी हमले बंद करने का एलान किया था, लेकिन गहरा घाव खाने के बावजूद सऊदी अरब ने इस संदेश को गंभीरता से नहीं लिया।
पिछले हफ़्ते सऊदी अरब ने हवाई हमले में एक ही परिवार के 7 लोगों को मौत के घाट उतार दिया, जिसमें 2 बच्चे भी शामिल थे।
तेल प्रतिष्ठानों पर हमले के बाद अंसारुल्लाह ने हमलावर देशों विशेष रूप से सऊदी अरब को चेतावनी दी थी कि अगर उसने उनके देश पर हमले जारी रखे तो अरामको पर किए गए हमले से भी कहीं अधिक भयानक हमले किए जायेंगे।
इस चेतावनी को अभी एक हफ़्ता भी नहीं गुज़रा था कि यमनियों ने अमरीका के आधुनिकतम हथियारों को एक बार फिर धता बताते हुए सऊदी अरब के भीतर घुसकर एक बड़ी कार्यवाही कर दी, जिससे दुनिया भर में एक बार फिर अमरीका और सऊदी अरब को अपमान झेलना पड़ रहा है।
निश्चित रूप से यमन की इस सैन्य कार्यवाही ने सऊदी सेना के आत्मविश्वास को ढेर कर दिया है, जिसके बाद यमनियों के ख़िलाफ़ लड़ने के लिए उनमें कोई साहस बाक़ी नहीं रहेगा।
इसके उलट यमनी बलों का मनोबल इतना मज़बूत है कि उन्होंने सबसे पहले बंधक बनाए गए सऊदी सैनिकों की सुरक्षा के लिए ज़रूरी क़दम उठाए। बंधक बनाए गए सऊदी सैनिकों को जान का ख़तरा किसी और से नहीं बल्कि अपने देश से ही है।
इससे पहले कई बार सऊदी युद्धक विमानों ने इन जेलों और अस्पतालों को निशाना बनाया है, जहां बंधक बनाए गए सऊदी सैनिकों को रखा गया था। अभी हाल ही में सऊदी लड़ाकू विमानों ने ज़म्मार जेल पर बमबारी करके अपने ही 200 से अधिक सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया था।
यमनी सेना के प्रवक्ता के मुताबिक़, बंधक बनाए गए 2000 से भी अधिक सऊदी सैनिकों के बीच कई वरिष्ठ अधिकारी भी हैं, सऊदी अरब की यही सबसे बड़ी कमज़ोरी भी है, जिससे वह काफ़ी निराश है। क्योंकि यह अधिकारी जब ज़बान खोलेंगे तो युद्ध अपराधों के ऐसे कई रहस्यों से पर्दा उठेगा, जो अभी तक दुनिया को नहीं मालूम थे।
लेकिन यहां यह सवाल है कि जिस तरह से अमरीका और सऊदी अरब ने अरामको के तेल प्रतिष्ठानों पर हमले का ईरान पर आरोप लगाकर अपनी कमज़ोरियों और बदनामी पर पर्दा डालने का प्रयास किया, वे नजरान में मिली इतनी बड़ी हार पर कैसे पर्दा डालेंगे?