सुप्रीम लीडर की वेबसाइट की ओर से जारी होने वाले इंटरव्यू में सैयद हसन नसरुल्लाह ने बताया कि 11 सितम्बर की घटना के बाद इमाम ख़ामेनई ने अमरीका का डटकर मुक़ाबला किया जबकि उस समय इलाक़े के अधिकतर लोग भयभीत हो गए थे और यह यक़ीन कर चुके थे कि अमरीका इस इलाक़े पर क़ब्ज़ा करने आ रहा है।
सैयद हसन नसरुल्लाह ने कहा कि इस लड़ाई की कमान संभालने के लिए राजनैतिक व एतिहासिक दूरदर्शिता तथा दीनदारी और निष्ठा के साथ ही बहुत अधिक साहस की भी ज़रूरत है क्योंकि आप दुनिया की एकमात्र सुपर पावर और साम्राज्यवादी ताक़त का मुक़ाबला करने जा रहे हैं जो बेहद आक्रोश में है और किसी भी नियम और क़ानून को मानने के लिए तैयार नहीं है।
सैयद हसन नसरुल्लाह ने कहा कि सुप्रीम लीडर उस सम्राज्यवादी ताक़त के सामने डट गए वह भी इस तरह कि केवल झुकने से इंकार नही किया बल्कि आक्रामक मुद्रा में लगातार आगे बढ़ते रहे, इस इलाक़े में इन वर्षों में अमरीकी एजेंडे के ख़िलाफ़ जिसने लड़ाई का नेतृत्व किया वह सुप्रीम लीडर इमाम ख़ामेनई की हस्ती है।
सैयद हसन नसरुल्लाह ने इस इंटरव्यू में सुप्रीम लीडर की नसीहत के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि जब मैंने ज़िम्मेदारी के बहुत भारी बोझ को महसूस किया और इसकी शिकायत इमाम ख़ामेनई से की तो उन्होंने कहा कि जब बहुत थकन महसूस हो या कठिनाई का आभास हो तो मेरी नसीहत यह है कि इस तरीक़े को आज़माइए, तरीक़ा यह है कि कमरे में बैठ जाइए, पांच दस मिनट या पंद्रह मिनट तनहाई में अल्लाह से बात कीजिए।
सैयद हसन नसरुल्लाह ने कहा कि मैंने इस नसीहत की बरकतें बहुत स्पष्ट रूप में महसूस कीं।