6 सितंबर 2019 - 12:24
 ज़रीफ़ की यूरोप को दो टूक, ईरान पर रहम न करो, केवल अपने वादों पर अमल करो और अमरीकी सूली से ख़ुद को बचाओ

इस्लामी गणतंत्र ईरान के विदेशमंत्री मुहम्मद जवाद ज़रीफ़ ने देश के परमाणु समझौते के संबंध में वचनों को कम करने के तीसरे क़दम के बाद यूरोप के बयानों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यूरोपीय पक्ष को ईरान पर रहम करने करने कोई ज़रूरत नहीं है बल्कि उनसे अपेक्षा की जा रही है कि वे अपने वचनों पर अमल करें।

ABNA: इर्ना की रिपोर्ट के अनुसार विदेशमंत्री मुहम्मद जवाद ज़रीफ़ ने ढाका से जकार्ता पहुंचने पर पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि यूरोप के परमाणु समझौते में कुछ वचन हैं और यह वचन न तो अमरीका से संबंधित हैं और न ही इनके लिए अमरीका की अनुमति की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि यूरोप को अब यह समझ लेना चाहिए कि यदि वे अमरीका से अपने वचनों पर अमल करने के लिए अनुमति लेना चाहते हैं तो अमरीका कभी भी इसकी अनुमति नहीं देगा।

इससे पहले इस्लामी गणतंत्र ईरान के विदेशमंत्री ने एक बार फिर कहा कि क्षेत्रीय सुरक्षा को बाहर से ख़रीदा नहीं जा सकता। इसी मध्य अपने एक ट्वीट में विदेशमंत्री डाक्टर मुहम्मद जवाद ज़रीफ़ ने यूरोप को सलाह दी है कि वह स्वयं को अमरीकी सूली से बचाने का प्रयास करे।

ढाका में हिन्द महासागर के तटवर्ती देशों के संगठन आईओआरए की वार्षिक बैठक को संबोधित करते हुए विदेशमंत्री ने कहा कि क्षेत्रीय सुरक्षा को बाहर से ख़रीदने का क्षेत्र में सैन्य छावनियों में वृद्धि के अतिरिक्त कोई परिणाम सामने नहीं आएगा।

उन्होंने यह बात बल देकर कही कि क्षेत्रीय सुरक्षा को केवल क्षेत्रीय देशों के बीच सहयोग द्वारा ही सुनिश्चित किया जा सकता है। डाक्टर मुहम्मद जवाद ज़रीफ़ ने हिन्द महासागर के तटवर्ती देशों की जनता की खाद्य सुरक्षा और जनकल्याण पर ध्यान केन्द्रित किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया।

ईरान के विदेशमंत्री का कहना था कि हिन्द महासागर के क्षेत्र को विभिन्न प्रकार की चुनौतियों का सामना है जिनमें मानव तस्करी, मादक पदार्थ, हथियारों के व्यापार, ग़ैर क़ानूनी मछलियों का शिकार, प्रदूषण और समुद्री भंडार का ग़ैर क़ानूनी प्रयोग इत्यादि शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि ईरान समस्त चुनौतियों से निपटने के उद्देश्य से समस्त देशों के साथ सहयोग के लिए तैयार है। ईरान के विदेशमंत्री ने एकपक्षीय प्रतिबंधों, कट्टरपंथी कार्यवाहियों और गन बूट कूटनीति को अंतर्राष्ट्रीय समुद्री क़ानून की सत्ता के रास्ते में सबसे बड़ी रुकावट क़रार दिया।

डाक्टर मुहम्मद जवाद ज़रीफ़ ने कहा कि किसी भी देश के नागरिकों के विरुद्ध ग़ैर क़ानूनी प्रतिबंधों के परिणाम में आर्थिक आतंकवाद जन्म लेता है और यह स्थिति न केवल हिन्द महासागर के तटवर्ती देशों के लिए बल्कि पूरी दुनिया के लिए बड़ी चुनौती है।

इसी मध्य विदेशमंत्री डाक्टर मुहम्मद जवाद ज़रीफ़ ने अपने एक ट्वीट में यूरोप को सलाह दी है कि तुम्हें (यूरोप) अमरीकी सूली से स्वंत्रता प्राप्त करना है।

विदेशमंत्री ने अमरीका के फ़ारेन इस्टस कंट्रोल आफ़िस की ईरान विरोधी कार्यवाहियों का हवाला देते हुए यरोप पर कटाक्ष किया कि यदि तुम इस संस्था से (ईरान के साथ लेनदेन की अनुमति) मांगोगे तो तुम्हें दुस्साहस क आरोप में जेल में डाल दिया जाएगा और उसके बाद संभव है कि तुम्हें फांसी पर भी चढ़ा दिया जाएगा।

ईरान के विदेशमंत्री का कहना था कि अमरीका के आर्थिक आतंकवाद को ख़त्म करने का एक मात्र मार्ग यह है कि तुम (यूरोप) यह फ़ैसला कर लो कि तुम्हें अमरीका की सूली से मुक्ति प्राप्त करना है।

ईरान के विदेशमंत्री ने इससे पहले भी अपने एक ट्वीट में यूरोप को दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था क़रार देते हुए लिखा था कि यूरोप अपना भविष्य अमरीका के (फ़ारेन इस्टस कंट्रोल आफ़िस) के हाथों गिरवी न रखे।

उनका कहना था कि फ़ारेन इस्टस कंट्रोल आफ़िस ही पूरा अमरीका नहीं जबकि यूरोप अभी तक अमरीका की इसी दुकान पर अनुमति लेने के लिए खड़ा है।

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