सूरए लुक़मान की आयत क्रमांक 7 का अनुवाद:
और जब उसके समक्ष हमारी आयतों की तिलावत की जाती है तो वह घमंड से मुंह मोड़ कर चल देता है, मानो उसने उन्हें सुना ही नहीं, जैसे उसके कान सुन ही नहीं रहे हैं। तो उसे एक पीड़ादायक दंड की शुभ सूचना दे दीजिए।
संक्षिप्त टिप्पणी:
कुछ लोग होते हैं जो क़ुरआने मजीद की आयतें सुनने तक के लिए तैयार नहीं हैं, उनके बारे में सोचने और उन्हें स्वीकार करने की तो बात ही दूर रही।
इस आयत से मिलने वाले पाठ:
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घमंड व अहंकार की भावना सत्य और वास्तविकता को स्वीकार करने में रुकावट है और मनुष्य को पथभ्रष्टता व पतन में डाल देती है।
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ग़लत व व्यर्थ बातें सुनने से सत्य बात सुनने और स्वीकार करने की तैयारी समाप्त हो जाती है।