हिंदुस्तान के अनुसार भारतीय कप्तान ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर 'बीबीसी' को बताया कि हेलीकॉप्टर से जहाज पर उतरते ही ब्रिटिश अधिकारियों ने बंदूक का भय दिखाकर उनके निहत्थे चालक दल के सदस्यों को जहाज के डेक पर घुटनों के बल बैठाए रखा। उन्होंने बताया कि मैंने स्वयं को कप्तान बताया था लेकिन ब्रिटिश मेरीन ने इसकी अनदेखी की। उन्होंने कहा कि हमपर ब्रिटिश मेरीन ने बंदूकें तान दीं। वे चिल्लाते हुए कह रहे थे कि आगे देखो, आगे देखो। जहाज़ के कप्तान ने बताया कि उस समय वहां पर कोई नियम नहीं था। हम चालक दल के 28 निहत्थे सदस्य थे। उन्होंने कहा कि ब्रिटिश मेरीन के व्यवहार से केवल मैं ही नहीं बल्कि हर कोई स्तब्ध था। जिब्राल्टर स्ट्रेट में अवैध ढंग से रोके गए ईरानी जहाज के सेलिंग मास्टर और मुख्य अधिकारी दोनों ही भारतीय थे जिन्हें बाद में सशर्त ज़मानत दे दी गई।
ज्ञात रहे कि अमरीका के इशारे पर 5 जूलाई को जिब्राल्टर स्ट्रेट में ब्रिटेन की नौसेना ने ईरान के सुपरटैंकर ग्रेस-1 को रोक लिया था।