संयुक्त अरब इमारात का ईरान के ख़िलाफ़ अपने रुख़ से पीछे हटना इस बात का प्रमाण है कि ईरान के ख़िलाफ़ संभावित युद्ध में अपने घटकों के समर्थन से अमरीका मुकर चुका है। यमन के अलमयादीन टीवी चैनल ने अपनी एक समीक्षा में लिखा है कि ईरान व इमारात के तट रक्षक गार्डों की अंतिम बैठक वर्ष 2013 में हुई थी और अब से कुछ हफ़्ते पहले तक किसी को भी इस बात की आशा नहीं थी कि तेहरान में इस प्रकार की बैठक हो सकती है। तटरकक्ष बल के बहाने यमन के सैन्य दल की तेहरान यात्रा केवल इमारात के पीछे हटने की तरफ़ इशारा नहीं करती बल्कि यह इस बात की भी सूचक है कि तेहरान की ओर से अबू धाबी के लिए दरवाज़े बंद किए जाने के बाद इमारात ने कितनी कोशिश की है।
अबू धाबी ने यमन के ख़िलाफ़ अतिक्रमण करके और ईरान के विरुद्ध युद्ध के लिए अन्य देशों को उकसा कर रेड लाइन क्राॅस कर दी थी यहां तक कि अमरीकी ड्रोन को मार गिराने के बाद ईरान ने उसके इमारात से उड़ने पर रोष प्रकट किया था। लेबनान के हिज़्बुल्लाह संगठन के महासचिव सैयद हसन नसरुल्लाह ने भी सऊदी अरब और इमारात को ईरान से टकराने से रोकते हुए उन्हें शीशों का शहर बताया था। यमन के कुछ क्षेत्रों से इमारात के सैनिकों के पीछे हटने से पता चलता है कि अबू धाबी को अब इस बात का विश्वास नहीं रह गया है कि ईरान के ख़िलाफ़ किसी संभावित युद्ध में अमरीका उसका समर्थन करेगा। यही कारण है कि इमारात ने शांति के बारे में बात करने वाले कुछ लोगों के माध्यम से ईरान को कुछ गुप्त संदेश भेजने की कोशिश की। यही नहीं रियाज़ द्वारा ईरान के एक समुद्री जहाज़ को मुक्त किए जाने के बाद संयुक्त राष्ट्र संघ में सऊदी अरब के प्रतिनिधि ने भी तेहरान के साथ कूटनैतिक संबंधों की बहाली के लिए रियाज़ की तैयारी की घोषणा की।
इसके मुक़ाबले में फ़ार्स की खाड़ी में स्वतंत्र जहाज़रानी के समर्थन का गठजोड़ बनान की अमरीका की कोशिशें सफल नहीं रहीं। माइक पोम्पियो ने जापान, दक्षिणी कोरिया और जर्मनी को फ़ार्स की खाड़ी में अपने समुद्री जहाज़ों की रक्षा के लिए गठजोड़ में शामिल होने का निमंत्रण दिया लेकिन उसका कोई विशेष परिणाम नहीं निकला। इसी कारण पोम्पियो को घोषणा करनी पड़ी कि इस गठजोड़ के गठन के लिए अधिक समय की आवश्यकता है। ब्रिटेन, जिसने अपना एक डिस्ट्रायर भेज कर पोम्पियो के निमंत्रण का सकारात्मक उत्तर दिया है, जहाज़ों की रक्षा के बारे में बड़ी बड़ी डींगें मार रहा है लेकिन आईआरजीसी ने उसके दावों की हवा निकाल दी। ईरान द्वारा रोके गए ब्रिटेन के तैल टैंकर को एक ब्रिटिश डिस्ट्राय एस्कोर्ट कर रहा था लेकिन वह ईरानी बलों के सामने कुछ भी न कर सका। इससे पता चलता है कि ब्रिटेन दूसरों के तो क्या अपने समुद्री जहाज़ों की रक्षा करने में भी सक्षम नहीं है।