ईरान और अमरीका के मध्य बढ़ते तनाव के दौरान मेरे विचार में इस्राईल का सब से बड़ा कर्तव्य यह है कि वह इस तनाव से दूर ही रहे और ईरान के खिलाफ लड़ने वाले योद्धा भी भांति मैदान में न कूदे, यहीं नहीं बल्कि मेरे विचार में तो इस्राईल को ईरानियों को मारने के बारे में शेखी बघारने से भी बचना चाहिए जैसा कि " तेसाही हंग़बी " ने कहा है। ईरान के खिलाफ युद्ध करने से पहले इस सवाल का जवाब ज़रूरी है कि हिज़्बुल्लाह और हमास का क्या होगा जो ईरान के घटक हैं? मैं विशेषकर हिज़्बुल्लाह और गत 13 तारीख को हसन नसरुल्लाह के बयान में कहे गये दो विषयों पर ध्यान केन्द्रित करना चाहता हूं।
पहली विषय, फायर की हिज़्बुल्लाह की ताक़त है जैसे मिसाइलें, राकेट लांचर और ड्रोन विमान। यह शक्ति, जैसा कि हसन नसरुल्लाह ने कहा है, इस्राईल के गर्भ को भी निशाना बना सकती हैं जैसे बिन गोरियन हवाई अड्डे को , डेमोना परमाणु प्रतिष्ठान को , खुज़ैरा के बिजलीघर को ,तेलअबीब में रक्षा मंत्रालय के मुख्यालय को, वायु सेना की छावनी को, परमाणु प्रतिष्ठानों को और इसी तरह के कई ठिकानों और केन्द्रों को हिज़्बुल्लाह बड़ी आसानी से निशाना बना सकता है। ध्यान योग्य बिन्दु यह है कि हम खोखली धमकी और निराधार बयानबाज़ी की बात नहीं कर रहे हैं, हसन नसरुल्लाह की इन धमकियों का मज़बूत आधार है और हिज़्बुल्लाह इस्राईल में तबाही फैलाने की शक्ति रखता है।
दूसरा विषय इरादे और नीयत का है। इन धमकियों के बावजूद हसन नसरुल्लाह यह नहीं कहते कि अगर अमरीका और ईरान के मध्य युद्ध हुआ तो वह निश्चित रूप से इस्राईल के खिलाफ सैन्य कार्यवाही कर देंगे। बल्कि वह अपनी विनाशक शक्ति का प्रदर्शन करने पर ही संतोष करते हैं। इस तरह से इस सवाल का जवाब नहीं मिल पाता कि क्या वह इस्राईल के खिलाफ कुछ करेंगे? उनकी कार्यवाही कैसी होगी? क्या वह इस्राईल के खिलाफ अपनी पूरी शक्ति और साधन प्रयोग करेंगे या धीरे धीरे शक्ति बढ़ांएगें?
यह अस्पष्टता वास्तव में ईरान की तरफ से है। यह शैली ईरान के सभी घटकों में नज़र आती है चाहे वह लेबनान में हिज़बुल्लाह हो, गज़्ज़ा में हमास और इस्लामी जेहाद हो, या फिर यमन और लाल सागर में हौसी हों। ईरान ने हिज़्बुल्लाह को शक्तिशाली बनाया है और इस शक्ति से लाभ भी वही उठाएगा। तो क्या ईरान अपनी शक्ति के इस कार्ड को प्रयोग करेगा? अगर हां तो कब? अब लौटते हैं इस्राईल की ओर... युद्ध की दशा में जो कि खुफिया एजेन्सियों की रिपोर्टों के विपरीत है, हिज़्बुल्लाह इस्राईल के बेहद महत्वपूर्ण केन्द्रों और नागरिकों के खिलाफ अपनी विनाशक शक्ति का निश्चित रूप से प्रयोग करेगा। अब अगर ऐसा हुआ तो हिज़्बुल्लाह के भयानक व तबाही फैलाने वाले मिसाइलों से बचाव का इस्राईल के पास क्या रास्ता होगा? इस सवाल के जवाब में इस्राईली नेता कहते हैं कि हम लेबनान को पाषाण काल में पहुंचा देंगे। लेकिन यह बस कहने के लिए एक जवाब है। अस्ल सवाल यह है कि क्या हमारी एन्टी मिसाइल व्यवस्था, नागरिकों की सुरक्षा कर पाएगी? यह एक बहुत बड़ा प्रश्न चिन्ह लग जाता है। विशेषज्ञों की एक बड़ी संख्या वर्षों से यह कह रही है कि सुरक्षा नहीं कर पाएगी। इस विफलता के बहुत से कारण हैं जिनमें एक कारण आर्थिक समस्या है। हमारे पास एन्टी मिसाइल सिस्टम की 1.300 मिसाइलें, हिज़्बुल्लाह की ओर से हम पर एक ही दिन में बरसायी जाने वाली 3000 मिसाइलों में से कुछ को ही तबाह कर पाएंगी और उनका भी एक दिन का खर्चा एक अरब डालर से अधिक आएगा तो अगर युद्ध दस दिनों तक जारी रहा तो क्या होगा? और अगर 30 दिनों तक जारी रहा तो? क्या यह सही है? यह प्रश्न चिन्ह लगा हुआ है जवाब का इंतेज़ार है।