25 जुलाई 2019 - 12:44
गुट निरपेक्ष आंदोलन को अब एक पंक्ति में खड़े होने की ज़रूरत हैः ज़रीफ़

अमेरिका की एकपक्षीय नीतियां अंतरराष्ट्रीय कानूनों को कमज़ोर करके उन्हें आघात पहुंचा रही हैं

विदेशमंत्री मोहम्मद जवाद ज़रीफ़ लैटिन अमेरिका की अपनी यात्रा के अंतिम पड़ाव में बोलीविया पहुंचे हैं जहां उन्होंने इस देश के अपने समकक्ष डीगो पेरी और राष्ट्रपति इवो मोरालेस से भेंटवार्ता की है।

विदेशमंत्री मोहम्मद जवाद ज़रीफ़ बोलीविया से पहले वेनेज़ोएला और निकारागुवा की यात्रा पर भी गये थे।

इन देशों की यात्रा से पहले विदेशमंत्री कई दिनों तक अमेरिका में थे और इस समय लैटिन अमेरिका में भी अमेरिकी अधिकारी उनकी यात्रा पर पैनी नज़र रखे हुए हैं। अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन विदेशमंत्री की यात्रा के प्रति अपनी संवेदनशीलता को न छिपा सके और उन्होंने अपने ट्वीटर हैंडल पर लिखा कि ईरानी विदेशमंत्री ने काराकास में निकोलस मादरू से इस प्रकार भेंट की जैसे वह अपने घर तेहरान में हों।

विदेशमंत्री ने काराकास में गुट निरपेक्ष आंदोलन के सदस्य देशों के विदेशमंत्रियों की बैठक में कहा था कि अमेरिका की एकपक्षीय नीतियां सबसे महत्वपूर्ण चुनौती है जिसका आंदोलन के समस्त सदस्य देशों को सामना है।

ध्यान योग्य बिन्दु यह है कि अमेरिका की एकपक्षीय नीतियां अंतरराष्ट्रीय कानूनों को कमज़ोर करके उन्हें आघात पहुंचा रही हैं और विभिन्न बहानों से विश्व की शांति व सुरक्षा को ख़तरे में डाल रही हैं।

विदेशमंत्री मोहम्मद जवाद ज़रीफ़ ने गुट निरपेक्ष आंदोलन के विदेशमंत्रियों की बैठक में बल देकर कहा था कि इस समय अंतरराष्ट्रीय कानूनों व विश्व व्यवस्था को हर समय से अधिक ख़तरा है इसलिए गुट निरपेक्ष आंदोलन के सदस्य देशों को एक पंक्ति में खड़े होने की ज़रूरत है और अगर ऐसा नहीं करते हैं तो हम सबको नुकसान होगा।

ईरान और लैटिन अमेरिकी देशों के बीच काफी भौगोलिक दूरी है परंतु राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक दृष्टि से एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। क्यूबा और वेनेज़ोएला जैसे देशों से ईरान के मधुर संबंधों को इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा सकता है।

बहरहाल ईरान के विदेशमंत्री की यह यात्रा जहां अमेरिकी अधिकारियों को प्रसंद नहीं आ रही है वहीं यह यात्रा ईरान और लैटिन अमेरिकी देशों के बीच अधिक से अधिक सहयोग व सहकारिता का कारण बनेगी।