22 जुलाई 2019 - 13:37
सुप्रीम लीडर की धमकी, सिपाहे पासदारान का आप्रेशन, तेल टैंकरों की यह लड़ाई कहां जाएगी? अमरीका और उसके अरब तथा पश्चिमी घटक क्या ग़

ईरान के ख़िलाफ़ इन दिनों दुशमनी की तलवार लहराने वाले पश्चिमी देशों विशेष रूप से अमरीका से सबसे बड़ी ग़लती यह हो रही है कि वह ईरान तथा उसके घटकों की ताक़त का सही आंकलन नहीं कर पा रहे हैं। यही वजह है कि संकट बढ़ता जा रहा है जिसका एक उदाहरण टैंकरों को ज़ब्त किए जाने की घटना है।

जब ईरान की इस्लामी क्रान्ति के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह सैयद अली ख़ामेनई ने एक सप्ताह पहले ब्रिटेन को चेतावनी दे दी कि ब्रिटेन ने जिब्राल्टर स्ट्रेट में जिस ईरानी तेल टैंकर को पकड़ा है अगर उसे नहीं छोड़ा तो जवाबी कार्यवाही की जाएगी तो ब्रिटिश सरकार को यह लगा कि शायद यह खोखली धमकी है, इस पर कोई व्यवहारिक कार्यवाही नहीं होगी। मगर अब देखिए कि ईरान की पासदाराने इंक़ेलाब फ़ोर्स आईआरजीसी ने इस धमकी पर शब्दशः अमल करते हुए हुरमुज़ स्ट्रेट में ब्रिटेन का तेल टैंकर पकड़ लिया। फ़ोर्स के प्रवक्ता ने कहा कि तेल टैंकर ने समुद्री यातायात के नियमों को तोड़ा, एक ईरानी से टकराया और उसने पानी को दूषित किया।

ब्रिटेन ने जब ईरान का ग्रीस-1 सुपर आयल टैंकर पकड़ा तो इसलिए नहीं पकड़ा कि उसने अंतर्राष्ट्रीय समुद्री यातायात के नियमों को तोडा था बल्कि केवल वाशिंग्टन के इशारे पर और विशेष रूप से राष्ट्रपति ट्रम्प का कहने पर यह क़दम उठाया। जब इसके जवाब में पासदाराने इंक़ेलाब फ़ोर्स की नौकाओं ने फ़ार्स की खाड़ी में दो ब्रितानी जहाज़ पकड़ लिए (इनमें से एक को बाद में छोड़ दिया) तो यह क़दम इसलिए उठाया कि ब्रिटिश सरकार पर ईरान के तेल टैंकर को छोड़ने के लिए दबाव बने।

ईरानी प्रशासन पश्चिमी देशों को यह संदेश साफ़ तौर पर देना चाहता है कि वह जो कहता है उसे करता भी है, यदि किसी ने उसके ख़िलाफ़ शत्रुता की कार्यवाही की तो वह जवाबी कार्यवाही करने में आख़िरी हद तक जाएगा चाहे मामला युद्ध की कगार तक क्यों न पहुंच जाए। अर्थात यह कि पश्चिमी देशों की ओर से लगाए जाने वाले प्रतिबंधों के सामने वह हरगिज़ नहीं झुकेगा। ईरान में वह सरकार राज कर रही है जो पश्चिमी देशों को इस बात की हरगिज़ अनुमति नहीं देगा कि प्रतिबंध लगाकर उसकी जनता को वह भूखों मार दें, उसे न तो अमरीकी विमान वाहक युद्धपोत का डर है और न ब्रिटेन का कोई ख़ौफ़। यह वह सरकार है जो वार्ता की मेज़ पर बैठेगी तो अपनी शर्तों के अनुसार बैठेगी। इस सरकार ने वायु सीमा का उल्लंघन करने वाले अमरीकी ड्रोन विमान को ढेर कर दिया और अपनी घोषणा के अनुसार युरेनियम का संवर्धन स्तर और उसकी मात्रा भी बढ़ा दी। अभी आगे बहुत कुछ होने वाला है।

फ़ार्स खाड़ी और हुरमुज़ स्ट्रेट में समुद्री यातायात पूरी तरह सुरक्षित था, इसमें कई दशकों से कोई समस्या नहीं पैदा हुई। समस्या की शुरुआत तब हुई जब अमरीका परमाणु समझौते से बाहर निकला और उसने ईरान के तेल निर्यात पर प्रतिबंध लगाए।

ईरान ताक़तवर है इसलिए नहीं कि उसके पास बैलिस्टिक मिसाइलों के बड़े भंडार हैं, तेज़ रफ़तार युद्धक नौकाएं हैं जो राडार के सक्रीन पर नज़र नहीं आतीं, बल्कि इसलिए कि ईरानी प्रशासन के पास मज़बूत इच्छा शक्ति है और गुस्ताखी करने वाली किसी भी ताक़त के ख़िलाफ़ जवाबी कार्यवाही का निर्णय लेने की ताक़त है।

मुझसे बीबीसी वर्ल्ड की एंकर ने पूछा कि यदि आप प्रधानमंत्री टेरेज़ा मे के सलाहकार होते तो उन्हें क्या सलाह देते? तो मैंने जवाब दिया कि मैं सलाहकार नहीं हूं और कभी नहीं बनूंगा मैं बस उन्हें नसीहत करना चाहता हूं कि जिस ईरानी तेल टैंकर को ब्रिटेन ने पकड़ा है उसे तत्काल छोड़ दे और दूसरी नसीहत यह कि राष्ट्रपति ट्रम्प और उनकी घातक नीतियों से ख़ुद को पूरी तरह दूर कर लें वरना ब्रिटेन मध्यपूर्व और फ़ार्स खाड़ी में कठिनाइयों के भंवर में फंस जाएगा।

आख़िर में यह भी बता दूं कि ईरान की प्रतिक्रिया केवल ईरान तक सीमित नहीं है बल्कि ईरान के घटक सीरिया, इराक़, लेबनान, यमन और ग़ज़्ज़ा पट्टी में भी मौजूद हैं। ट्रम्प को समझ लेना चाहिए कि वह ज़माना गुज़र चुका है कि जब अमरीका के युद्ध में शामिल होने के लिए देशों के बीच होड़ लग जाती थी। यह नया दौर है जिसमें पश्चिमी देशों की दादागीरी को सहन नहीं किया जाएगा।