12 जुलाई 2019 - 14:46
मंसूर हादी की सरकार में फूट या यमन में सऊदी अरब के अपराध के क्लंक को धोने की कोशिश!!!

यमन के इस्तीफ़ा दे चुके राष्ट्रपति अब्द रब्बोह मंसूर हादी ने अपने एक कमान्डर को सऊदी अरब की आलोचना करने पर पद्मुक्त कर दिया।

दरअस्ल सऊदी अरब यमन के दलदल में फंस चुका है। दक्षिणी यमन में सऊदी अरब और यूएई के बीच मतभेद बढ़ चुके हैं। यमनी सेना और अंसारुल्लाह की मीज़ाईल व ड्रोन ताक़त से सऊदी अरब को काफ़ी नुक़सान पहुंचा है। इस बीच यमन जंग का लंबा खिंचना रियाज़ पर विश्व जनमत का दबाव बढ़ने के साथ साथ रियाज़ के लिए कुछ दूसरे नकारात्मक परिणाम लाया है। जैसा कि यमन की इस्तीफ़ा दे चुकी सरकार की तरफ़ से लड़ रही फ़ोर्स द्वारा सऊदी अरब के क्रियाकलापों की आलोचना भी इसका एक परिणाम है। यह आलोचना यमन के ख़िलाफ़ जंग में सऊदी गठबंधन की हार की वजह से है।

इसी परिप्रेक्ष्य में मंसूर हादी की सरकार की सेना के मीडिया व आस्था विभाग के प्रमुख मोहसिन ख़ज़रूफ़ ने सऊदी अरब की कड़ी आलोचना करते हुए दावा किया कि सऊदी गठबंधन मंसूर हादी की सेना को न सिर्फ़ ज़रूरी हथियार नहीं दे रही बल्कि इस सेना के मार्ग में रुकावट पैदा कर रहा है।

यद्यपि यह बयान सऊदी अरब की आलोचना को दर्शाता है लेकिन यमन के ख़िलाफ़ जंग में सऊदी गठबंधन और उसके किराए के सैनिकों की हार की स्वीकारोक्ति भी है।

हालांकि मंसूर हादी ने सऊदी अरब के पाले में खेलने और इस देश की आलोचना करने वालों को हटा कर रियाज़ के प्रति अपनी निष्ठा दिखाने की कोशिश करते हुए मोहसिन ख़ज़रूफ़ को हटा दिया, लेकिन सऊदी अरब के प्रति उनकी वफ़ादारी भी यमन जंग की समाप्ति पर इस देश के भविष्य के सत्ता के ढांचे में उन्हें कुछ भी नहीं दिला पाएगी।

अंत में यह कि यमन की इस्तीफ़ा दे चुकी सरकार के मुख्य अधिकारियों द्वारा सऊदी अरब की आलोचना, यमन में उसके अपराध के क्लंक को नहीं धो सकती।