सेन्चरी डील को व्यवहारिक बनाने के लिए इसके आर्थिक आयाम पर बहरैन की राजधानी अम्मान में 24 और 25 जून को आर्थिक सम्मेलन हुआ जो नाकाम रहा। स्वशासित फ़िलिस्तीनी प्रशासन सहित सभी फ़िलिस्तीनी गुटों ने इस सम्मेलन का बहिष्कार किया। इस परिप्रेक्ष्य में ट्रम्प के सलाहकार व दामाद जेरेड कुश्नर ने जो इस योजना को लागू करने के लिए काम कर रहे थे, इस बात को स्वीकार किया कि फ़िलिस्तीनी गुटों ने मनामा आर्थिक सम्मेलन को नाकाम बनाया जो सेन्चरी डील को लागू करने की पृष्ठिभूमि बनती।
कुश्नर के शब्दों में मनामा सम्मेलन में बहुत सी अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों के प्रतनिधियों और व्यापारियों ने भाग लिया और बहुत से इस सम्मेलन में भाग लेना चाहते थे लेकिन उनका समर्थन नहीं हुआ और यह आर्थिक योजना फ़िलिस्तीनी नेताओं की मौजूदगी के बिना संपूर्ण नहीं हो पाएगी।
एक दूसरा अहम बिन्दु यह है कि सेन्चरी डील फ़िलिस्तीन मामले के हल के लिए योरोपीय संघ और रूस पर आधारित चारपक्षीय गुट के दूसरे सदस्यों तथा संयुक्त राष्ट्र संघ के दृष्टिकोण से भिन्न है इसलिए यूएन और चारपक्षीय गुट ने इसका विरोध किया है।
मनामा सम्मेलन की नाकामी से जो सेन्चरी डील के व्यवहारिक होने की दिशा में पहला क़दम थी, यह कहा जा सकता है कि सेन्चरी डील औंधे मुंह गिर चुकी है।