अतवान ने आगे लिखा कि युद्ध के इस चरण में अमरीका की ऐसी दुरगत बनी है कि अब इस्राईल और सऊदी अरब जैसे उसके सहयोगी भी उस पर भरोसा नहीं करेंगे।
पहले सीधे संघर्ष में ट्रम्प ने सफ़ेद ध्वज उठाया और आत्मसमर्पण कर दिया। यह टकराव ईरान द्वारा अमरीकी सैन्य उद्योग का ताज माने जाने वाले ड्रोन विमान ग्लोबल हॉक को मार गिराने के बाद शुरू हुई।
ईरान ने यह आधुनिक ड्रोन रूसी, चीनी या अमरीकी वायु रक्षा प्रणाली से नहीं गिराया है, बल्कि स्वदेश निर्मित मिसाइल से मार गिराया है।
अपने सहयोगियों की नज़र में ही अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प डरपोक, ढुलमुल और झूठे व्यक्ति बन गए हैं। ट्रम्प की इस छवि ने महा शक्ति के रूप में अमरीका को भारी नुक़सान पहुंचाया है।
उसके बाद ट्रम्प ने दावा किया कि उन्होंने ईरान पर जवाबी हमला करने का आदेश दिया, लेकिन ठीक 10 मिनट पहले उसे वापस ले लिया, यह ऐसा झूठ है, जिस पर कोई 10 साल का बच्चा भी यक़ीन नहीं करेगा।
अतवान आगे लिखते हैं कि अमरीकी झूठ के सीरियल की अंतिम कड़ी का पर्दाफ़ाश कि अमरीकी ड्रोन ने ईरान की वायु सीमा का उल्लंघन नहीं किया है, ईरानियों की उन तस्वीरों से हो गया, जिसमें उन्होंने ड्रोन का ढांचा दिखाया है।
दूसरे यह कि जब अमरीका, इराक़, अफ़ग़ानिस्तान, सीरिया, लीबिया और वियतनाम में लाखों लोगों को मौत के घाट उतार चुका है, उस देश का राष्ट्रपति कैसे यह दावा कर सकता है कि उसने हमले का आदेश सिर्फ़ इसलिए वापस ले लिया, क्योंकि इसमें 150 लोगों के जीवन को ख़तरा था। अगर हक़ीक़त में ट्रम्प ईरानियों की जानों का सम्मान करते हैं तो क्यों उनके ख़िलाफ़ इतने कड़े प्रतिबंध लगा रहें कि वे भूख से मर जाएं।
ईरान ने जिस ड्रोन को मार गिराया है, उसकी सबसे महत्वपूर्ण विशेषता 20 किमी की ऊंचाई से तस्वीरें उतारने की है और इसमें बहुत ही आधुनिक सेंसर लगे हुए हैं। अब विगत की तरह निश्चित रूप से ईरान इस तकनीक को आसानी से हासिल कर सकेगा।
अमरीकी सहयोगी तेल-अवीव और फ़ार्स खाड़ी के देशों की राजधानियों में इस महान घटना के कारण सीना पीट रहे हैं और मातम कर रहे हैं। हालांकि इससे पहले वे इस शताब्दी का सबसे बड़ा जश्न मनाने के लिए तैयार हो रहे थे, इसलिए कि उनका मानना था कि अमरीका अपनी शक्ति से ईरान को मिटा देगा और इस्लामी क्रांति का पतन कर देगा।