20 जून 2019 - 15:54
क्या ईरान अमरीका मुर्दाबाद के नारे को छोड़ कर व्यवहारिक क़दम उठाने लगा है? क्या है ट्र्म्प की मूर्खता? बताया अब्दुल बारी अतवान न

ईरान पर ट्रम्प के हालिया बयान का एक जायज़ा पेश किया है अरब जगत के प्रसिद्ध टीकाकार अब्दुलबारी अतवान ने।

अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने टाइम पत्रिका के साथ हालिया इन्टरव्यू में ईरान के बारे में जो कुछ कहा उससे यह साबित हो गया कि वह कितने सीधे बल्कि मूर्ख हैं। उन्होंने सन 2015 में परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर से पहले और उसके बाद, ईरानी राष्ट्रपति के भाषण का उल्लेख करते हुए कहा कि इस बार के भाषण में अमरीका मुर्दाबाद, अमरीका को तबाह कर देंगे जैसे नारे नहीं थे।

    ट्रम्प की ओर से इस बदलाव को अगर सही हो तब भी, बहुत बड़ी सफलता बताया जाना निश्चित रूप से मूर्खता है इस प्रकार की मूर्खता प्रायः अरब नेताओं में नज़र आती है क्योंकि अगर हम अमरीकी विदेशमंत्री माइक पोम्पियो के इस दावे को सच मान लें कि ओमान सागर में आयल टैंकरों पर हमले के पीछे आईआरजीसी से संबंधित लोगों का हाथ है तो इसका मतलब यह होता है कि ईरान, नारे से आगे बढ़ कर व्यवहारिक क़दम के चरण में दाखिल हो चुका है और यह बहुत बड़ा बदलाव है जिसे समझना शायद अमरीका के वर्तमान राष्ट्रपति के लिए संभव नहीं है।

   हम इस पर और अधिक बात करते और कहते हैं कि राष्ट्रपति ट्रम्प को अपने इस बयान पर बहुत अफसोस होगा क्योंकि वह स्वंय कहते हैं कि ईरान ने क्षेत्र में सैन्य कार्यवाहियों की कमान संभाल ली है इस तरह से अमरीका के दावे के अनुसार एक महीने के भीतर दो बार ईरान ने सैन्य कार्यवाही की है और जिस तरह से यह हमले हुए हैं अगर अमरीकी दावा सही है तो ट्रम्प को तो डरना चाहिए क्योंकि हमला बेहद दक्षता के साथ किया गया है क्योंकि हमला करने वालों ने अपने पीछे कोई सुबूत नहीं छोड़ा और इस क्षेत्र में चक्कर लगाने वाले युद्धपोतों, सैन्य ठिकानों और सेटेलाइटों की आंखों से बचते हुए सुरक्षित अपने ठिकानों पर पहुंच गये।

    इस में कोई संदेह नहीं है कि आर्थिक प्रतिबंधों की वजह से ईरान पर बेहद दबाव पड़ रहा है और उसकी तेल की आमदनी बहुत कम हो गयी है लेकिन यह हक़ीक़त है कि ईरान, रक्षात्मक पोज़ीशन से, आक्रामक पोज़ीशन में आ गया है और अमरीका मुर्दाबाद नारा लगाने के बजाए व्यवहारिक क़दम उठा रहा है और यह ऐसी चीज़ है जिस पर ट्रम्प को चिंतित होना चाहिए।

    यह जो आईआरजीसी के प्रमुख जनरल हुसैन सलामी ने कहा है कि ईरान के अत्यन्त सटीक निशाना लगाने वाले मिसाइल, युद्धपोतों और विमान वाहक जलपोतों को तबाह करने और समीकरण बदलने की शक्ति रखते हैं, तो वह कोई संयोग नहीं है और नही गलती से ऐसा बयान दे दिया गया बल्कि यह जान बूझ कर राष्ट्रपति ट्रम्प और उनके सुरक्षा सलाहकार के लिए संदेश है।

अमरीका, आयल टैंकरों पर हमले का ज़िम्मेदार, ईरान को बता रहा है लेकिन उसके इस दावे पर किसी को विश्वास नहीं है और युरोपीय देशों , रूस और चीन ने इस दावे पर संदेह प्रकट किया है लेकिन यह ठोस सच्चाई है कि ईरान, डरता बिल्कुल नहीं और वह किसी भी दशा में यह स्वीकार नहीं करेगा कि आर्थिक प्रतिबंधों के कारण उसका देश भूख का शिकार हो।