आर्मेनिया में ईरानी दूतावास ने फर्जी वीजा और निवास संबंधी दस्तावेजों के इस्तेमाल को लेकर ईरानी नागरिकों को चेतावनी दी है। दूतावास के मुताबिक, हाल के दिनों में फर्जी वीजा और रेजिडेंस कार्ड रखने के आरोप में ईरानी नागरिकों की गिरफ्तारी के मामले बढ़े हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आर्मेनिया में स्थित ईरानी दूतावास के कांसुलर विभाग ने एक बयान जारी कर बताया है कि कुछ ईरानी नागरिक ईरान और तुर्की की एजेंसियों को बड़ी रकम देकर पश्चिमी देशों के वीजा हासिल करते हैं। इसके बाद वे आर्मेनिया के रास्ते उन देशों की यात्रा करने की कोशिश करते हैं।
लेकिन आर्मेनिया के हवाई अड्डों और सीमा चौकियों पर आधुनिक स्कैनिंग और जांच व्यवस्था के कारण फर्जी वीजा आसानी से पकड़ में आ जाते हैं। खास तौर पर राजधानी येरेवान के ज़्वार्टनॉट्स हवाई अड्डे पर ऐसे दस्तावेजों की कड़ी जांच की जाती है।
दूतावास ने बताया कि कई देशों में फर्जी दस्तावेज मिलने पर यात्री को यात्रा करने से रोककर जुर्माना लगाया जाता है और वापस भेज दिया जाता है। लेकिन आर्मेनिया में इस अपराध को बेहद गंभीर माना जाता है।
ऐसे मामलों में गिरफ्तार लोगों को लंबे समय तक कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। उन्हें कई वर्षों तक आर्मेनिया छोड़ने की अनुमति नहीं मिल सकती और जेल की सजा भी हो सकती है। इन मामलों की जांच सुरक्षा एजेंसियों के माध्यम से किए जाने के कारण कानूनी प्रक्रिया और भी कठिन हो जाती है।
दूतावास कहा कि गिरफ्तार होने वालों में कई पढ़े-लिखे, कुशल और सफल लोग भी शामिल हैं, जो कुछ एजेंसियों के लालच और दस्तावेजों की सही जांच न करने के कारण मुश्किल में फंस गए।
ईरानी दूतावास ने अपने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी तीसरे देश का वीजा हासिल करते समय उसकी असलियत और वैधता की पूरी जांच करें।
दूतावास ने विशेष रूप से चेतावनी दी है कि यदि वीजा के असली होने पर एक प्रतिशत भी संदेह हो, तो उस वीजा के साथ आर्मेनिया के रास्ते यात्रा बिल्कुल न करें। ऐसा करने पर लोगों को कई वर्षों तक गंभीर कानूनी परेशानियों, जेल और यात्रा प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है।
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