यमन के रक्षामंत्री मोहम्मद नासिर अलआतेफ़ी ने इस देश के खिलाफ सऊदी अरब के 50 महीनों के पाश्विक हमलों के दौरान शनिवार को पहली बार सऊदी अरब में प्रवेश किया। सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि यमन में रक्षामंत्री ने सऊदी अरब में जो प्रवेश किया उसके संदेश और उद्देश्य क्या हैं?
प्रतीत यह हो रहा है कि इस काम का सबसे पहला संदेश यह है कि यमन संकट के संबंध में शक्ति का संतुलन बदल रहा है। इस बात में कोई संदेह नहीं है कि सउदी अरब की अगुवाई में काम करने वाले गठबंधन की सैन्य शक्ति की तुलना यमनी सेना और स्वयं सेवी सेना से नहीं की जा सकती।
इस युद्ध के कारण हालिया दशक में यमन को विश्व की सबसे बड़ी मानव त्रासदी का सामना है और 80 प्रतिशत से अधिक इस देश की मूलभूत संरचनाएं तबाह हो चुकी हैं। यमनी सेना अधिकतर रक्षात्मक मुद्रा में रही है। इसके बावजूद शनिवार को यमन के रक्षामंत्री ने सऊदी अरब के सीमावर्ती क्षेत्र नजरान में प्रवेश किया।
उनके इस प्रवेश से यह संदेश जा रहा है कि सउदी अरब ने यमन के खिलाफ जो युद्ध आरंभ कर रखा है वह यमनियों से अधिक सऊदी अरब और उसकी अगवाई में काम करने वाले गठबंधन के लिए खतरा बन गया है क्योंकि यमनी सेना और स्वयं सेवी सेना के जवानों ने सिद्ध कर दिया है कि दिन- प्रतिदिन उनकी शक्ति में वृद्धि हो गयी है।
सऊदी अरब के नजरान क्षेत्र में यमनी रक्षामंत्री के जाने का दूसरा संदेश यह है कि यमनी सेना और स्वयं सेवी सेना के जवान सऊदी अरब के खिलाफ युद्ध की नई स्ट्रैटेजी को व्यवहारिक बनाने के प्रयास में हैं।
इस संबंध में यमनी पत्रकार कामिल अलमोअम्मरी ने लिखा है कि यमन के रक्षामंत्री के सऊदी अरब के नजरान क्षेत्र के निरीक्षण से हूसियो ने रियाज़ को कड़ा संदेश दे दिया है कि नजरान पर हमला निकट है और यह विकल्प मेज़ पर है।
बहरहाल सऊदी अरब ने 26 मार्च वर्ष 2015 को जब यमन पर हमला किया था तो उसने दावा किया था कि वह 20 दिन में विजय प्राप्त करके यमन युद्ध को खत्म कर देगा परंतु चार वर्ष का समय बीत गया और पांचवा साल आरंभ हो चुका है और आज तक सऊदी अरब यह युद्ध न जीत सका और अब उसे यमनी सेना द्वारा अपने नगरों पर कब्ज़ा कर लेने की चिंता सताने लगी है।