"मेरा मिशन" कार्यक्रम में आठवीं कक्षा के 76 छात्रों ने भाग लिया और अमरीका के परमाणु समझौते से एकपक्षीय रूप से बाहर निकलने और ईरान पर प्रतिबंध लगाने पर अपने विचार रखे।
छात्रों ने ज़मीनी वास्तविकताओं के आधार पर अमरीकी प्रतिबंधों का मुक़ाबला करने के लिए अपने प्रस्ताव पेश किए।
स्कूल का दौरा करने, छात्रों से बात करने और उनकी योजनाओं का आंकलन करने के बाद, ज़रीफ़ ने कहा कि इन छात्रों को ही अंतिम परीक्षा के रूप में ईरान-अमरीका के बीच राजनयिक, आर्थिक और सैन्य तनाव के चलते अपनी अहम भूमिका निभानी है।
उन्होंने कहा, ईरानी छात्रों ने अमरीकी प्रतिबंधों का मुक़ाबला करने के लिए जो सुझाव पेश किए, उससे साबित होता है कि वाशिंगटन को कदापि किसी ईरान को धमकी नहीं देनी चाहिए। #NeverThreatenAnIranian
छात्रों और अध्यापकों को संबोधित करते हुए ज़रीफ़ ने अमरीकी प्रतिबंधों का मुक़ाबला करने के लिए किए गए छात्रों के प्रयासों की सराहना की और कहा, मेरे जीवन का यह एक अच्छा दिन है। आपको देखकर आशा और ऊर्जा मिलती है, आप लोग देश का भविष्य हो, आज़ाद होकर सोचो, भविष्य पर नज़र रखो और आत्मविश्वास बनाए रखो।
ईरानी विदेश मंत्री का कहना था कि अमरीका क्षेत्र में अब शक्तिशाली नहीं है, बल्कि वह काफ़ी कमज़ोर स्थिति में है, इसलिए कि वह क्षेत्र में अपना कोई भी लक्ष्य प्राप्त नहीं कर सका है। अगर वे ज़्यादा से ज़्यादा दबाव की बात कर रहे हैं तो यह भी उनकी उदासीनता को दर्शाता है न कि उनकी शक्ति को।