अमरीका और ईरान के बीच तनाव में वृद्धि के साथ ही ट्रम्प के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने ईरान को धमकी देते हुए कहा है कि क्षेत्र में अमरीकी हितों या उसके घटकों पर किसी भी तरह के हमले का कड़ाई से जवाब दिया जाएगा।
रविवार को बोल्टन ने कहा, यूएसएस अबराहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रूप की क्षेत्र में तैनाती ईरान के रवैये के जवाब में की गई है।
अमरीका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने दावा किया कि अमरीका, ईरान के साथ युद्ध नहीं चाहता है, लेकिन हम आईआरजीसी की ओर से हर प्रकार के प्रॉक्सी हमले या ईरानी सुरक्षा बलों की किसी भी कार्यवाही का जवाब देने के लिए तैयार हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमरीका का यह एक भड़काऊ और उन्मादी क़दम है और इससे क्षेत्र या विश्व में शांति की स्थापना में कोई मदद नहीं मिलेगी।
इस अवसर पर बोल्टन ने ईरान को धमकी देते हुए जो संक्षिप्त बयान जारी किया है, इस पर कई सवाल खड़े हो गए हैं।
ईरान का मुक़ाबला करने का दावा करते हुए अमरीका द्वारा मध्यपूर्व में विमान वाहक पोत तैनात किया जाना कोई असामान्य बात नहीं है। लेकिन इस क़दम को जो बात असमान्य बना रही है वह बोल्टन का भड़काऊ बयान है।
मई 2018 में अमरीका ने परमाणु समझौते से निकलने के बाद ईरान पर फिर से प्रतिबंध लागू करने की घोषणा की थी और तेहरान को अलग थलग करने का एक बार फिर प्रयास किया, जो असफल होता नज़र आ रहा है।
इसी असफलता के कारण ट्रम्प प्रशासन क्रोधित है और वह क्षेत्र को एक और विनाशकारी युद्ध में धकेलना का प्रयास कर रहा है।
हालांकि बोल्टन ने कि जो ईरान के ख़िलाफ़ ट्रम्प प्रशासन की शत्रुतापूर्ण नीतियों का नेतृत्व कर रहे हैं, इस संबंध में अधिक विवरण पेश नहीं किया है।
22 अप्रैल को अमरीकी विदेश मंत्री ने एलान किया था कि भारत और चीन समेत जिन 8 देशों को नवम्बर 2018 में ईरान से तेल आयात के लिए 6 महीने की छूट दी गई थी, 2 मई 2019 से उन्हें यह छूट हासिल नहीं होगी।
इसी के साथ अमरीकी विदेश मंत्री ने ट्रम्प प्रशासन का यह दावा भी दोहराया था कि 2 मई के बाद वाशिंगटन ईरान के तेल निर्यात को शून्य तक पहुंचा देगा।
वाशिंगटन के इस दावे के बावजूद, 2 मई के बाद से भी ईरानी तेल टैंकर पूरी आज़ादी से तेल निर्यात कर रहे हैं।