पश्चिमी एशिया के इलाक़े में आतंकवाद कोई नई चीज़ नहीं है लेकिन दाइश का नाम ज़रूर नया है। इराक़ में दाइशी आतंकियों ने जो जघन्य अपराध किए हैं उनके उदाहरण मिलना तो दूर उनके बारे में बहुत से लोग कल्पना भी नहीं कर सकते थे। किसी इंसान को पिंजरें में बंद करके उसमें आग लगा देना। सामूहिक रूप से लोगों को लिटा कर उन्हें ज़िबह कर देना। बिन सर वाले शवों को कूड़ेदान में डाल देना। महिलाओं का बाज़ार लगाना, यह सब दाइशी आतंकवाद के बड़े भयानक रूप हैं। इन हृदय विदारक घटनाओं के वीडियो और तसवीरें देख कर या उनके बारे में सुनकर दसियों लाख की संख्या में इराक़ी अपनी बस्तियां छोड़ छोड़ कर दूसरे इलाक़ों में भागने पर मजबूर हो गए।
पूरे देश में उथल पुथल मच गई जबकि दुनिया के देश बड़ी ख़मोशी से केवल तमाशा देख रहे थे। अमरीका ने एक सैनिक एलायंस बनाया और दावा किया कि वह आतंकी संगठनों का सफ़ाया करना चाहता है लेकिन कुछ नहीं हुआ। अमरीकी अधिकारी साफ़ शब्दों में कह रहे थे कि दाइश के विरुद्ध युद्ध 25 साल या उससे भी अधिक लंबी खिंच सकती है। दरअस्ल अमरीका को दाइश के विरुद्ध कोई निर्णायक कार्यवाही करने में कोई रूचि ही नहीं थी क्योंकि दाइश को वह अपने हितों के लिए ख़तरा नहीं समझता था।
इस बीच इस्लामी गणतंत्र ईरान ने पश्चिमी एशिया के इलाक़े में अपने घटकों के साथ मिलकर दाइश तथा अन्य आतंकी संगठनों के विरुद्ध संघर्ष की कमान संभाली। इस संघर्ष में ईरान की पासदराने इंक़ेलाब फ़ोर्स सबसे आगे थी। इस फ़ोर्स ने इराक़ और सीरिया की सरकारों के अनुरोध पर इन देशों में अपनी गतिविधियां शुरू कीं और सारी दुनिया के सामने उदाहरण पेश किया कि आतंकी संगठन से किस तरह लड़ा जाता है। इराक़ और सीरिया की सेनाओं तथा वहां की स्वयं सेवी फ़ोर्सेज़ ने ईरानी सैन्य बलों विशेष रूप से पासदाराने इंक़ेलाब फ़ोर्स के साथ मिलकर जब मैदान में उतरी तो सफलताएं मिलनी शुरू हो गईं और दाइश के पावं उखड़ने लगे।
इसके लिए जहां इराक़ और सीरिया सहित अनेक देशों की जनता ईरान तथा पासदाराने इंक़ेलाब फ़ोर्स की आभारी है वहीं अमरीका की ट्रम्प सरकार ने मूर्खतापूर्ण और हास्यास्पद क़दम उठाते हुए पासदाराने इंक़ेलाब फ़ोर्स को आतंकी संगठन घोषित कर दिया। पासदाराने इंक़ेलाब फ़ोर्स ख़िलाफ़ अमरीका ने यह क़दम क्यों उठाया है यह कोई ढंकी छिपी बात नहीं है। असली वजह यह है कि पूरे पश्चिमी एशिया के इलाक़े में पासदाराने इंक़ेलाब फ़ोर्स और उससे जड़ी ताक़तें अमरीका की योजनाओं और साज़िशों के रास्ते की सबसे बड़ी रुकावट हैं।
इराक़ में ईरान के आभार और सराहना के लिए सम्मेलन के आयोजन से साबित हो गया कि क्षेत्र के जनमत को अमरीका अपनी साज़िशों से धोखा नहीं दे सकता।