इस समय लीबिया के दो हिस्से हैं एक भाग पर राष्ट्रीय एकता सरकार का शासन है जिसकी राजधानी त्रिपोली है और जिसे संयुक्त राष्ट्र संघ ने औपचारिकता दी है और फाइज़ सिराज उसके प्रधानमंत्री है। इसी दौरान " तबरक़" में दूसरी सरकार अपना दावा पेश करती है जिसे पूर्वी लीबिया की सरकार कहा जाता है और इस सरकार की बागडोर , लीबिया के जनरल, खलीफा हफ़्तर के हाथ में है। खलीफा हफ्तर ने लीबिया की राजधानी त्रिपोली पर क़ब्ज़े के लिए चढ़ाई कर दी है जिसके बाद इस देश में नया संकट आरंभ हो गया है। सऊदी अरब, यूएई, मिस्र और फ्रांस ने खलीफा हफ्तर का समर्थन किया है और अब अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भी खलीफा हफ्तर के समर्थकों में शामिल हो गये हैं जिसकी वजह से अमरीका के डेमोक्रेट नेताओं ने ट्रम्प की कड़ी आलोचना की है। ट्रम्प ने तो खलीफा हफ्तर से टेलीफोनी वार्ता भी की है
इन हालात में यह साफ महसूस हो रहा है कि ट्रम्प ने त्रिपोली में संयुक्त राष्ट्र संघ के समर्थन वाली सरकार से मुंह मोड़ लिया है और राजधानी त्रिपोली पर हमला करने वाले एक जनरल का जिन पर तानाशाह होने का आरोप भी है, भरपूर समर्थन कर रही है। इस संदर्भ में संयुक्त राष्ट्र संघ के टीकाकार, अब्दुल हमीद सैयाम कहते हैं , ट्रम्प और खलीफा हफ्तर के मध्य टेलीफोनी संपर्क में सऊदी अरब ने मुख्य भूमिका निभाई है, यह टेलीफोनी वार्ता इस लिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इस प्रकार से राजधानी त्रिपोली पर खलीफा हफ्तर के आक्रमण को अमरीका का समर्थन मिल गया और अमरीका, लीबिया संकट में यूएई और सऊदी अरब के साथ खड़ा नज़र आता है। इन हालात में यह निश्चित है कि राजधानी त्रिपोली पर खलीफा हफ्तर के आक्रमणों में तेज़ी आएगी।