ओडिसी एक आर्टिकल प्रकाशित किया है, जिसमें आदिल अल-जुबैर और मोसाद के संबंधों से पर्दा उठाया गया है।
इस आर्टिकल की लेखक जेमा बकले ने उल्लेख किया कि वह इस तथ्य से रोमांचित थीं कि इस्राईल की पूर्व विदेश मंत्री त्ज़िपी लिवनी भी जुबैर को मोसाद से क़रीब लाने में अहम भूमिका निभाती रही हैं।
उनका कहना है कि काफ़ी दिनों तक अध्ययन करने और खोजबीन करने के बाद मैं सीआईए के पूर्व अधिकारी मिस्टर फ़िलिप गिरालडी तक पहुंचने में सफल हो सकी। मिस्टर गिरालडी द्वारा किए गए कुछ रहस्योद्घाटनों से मैं हैरान थी। मैं जैसे जैसे इस मुद्दे की तह में गई बहुत ही आश्चर्यचकित जानकारियां मेरे हाथ लगीं। मुझे पिछले 10 वर्षों के दौरान सबसे विवादास्पद सच्चाई से पर्दा उठाने पर गर्व है।
बकले का कहना है कि मिस्टर गिलाडी ने विशेष रूप से आदिल अल-जुबैर से मोसाद के पहली बार संपर्क करने के बारे में जानकारी इकट्ठा करने में मेरी मदद की। कुछ बहुत ही दक्ष विशेषज्ञों और लेखकों की सहायता से हम आदिल अल-जुबैर के जीवन और मोसाद से उनके संबंधों की जानकारियां जुटाने का प्रयास कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार की जानकारी हासिल करने के लिए रियाज़ और तेल अवीव के बीच यात्राएं करने की आवश्यकता होती है।
गिरालडी के रहस्योद्घाटन के अनुसार, एफ़बीआई ने 1990 में पहली बार उस समय जुबैर की निगरानी करना शुरू की, जब उन्हें अमरीका स्थित सऊदी अरब के दूतावास का प्रवक्ता नियुक्त किया गया। कुछ वर्षों बाद ही इस्राईली ख़ुफ़िया एजेंसी मोसाद पर यह संदेह हुआ कि वह आदिल अल-जुबैर की एक एजेंट के रूप में सेवाएं लेना चाह रही है। 1981 में जुबैर जिस वक़्त नॉर्थ टैक्सास यूनिवर्सिटी में शिक्षा ग्रहण कर रहे थे, उसी दौरान उनके एक सहपाठी केय ऐनन मैथिव्ज़ ने उनसे संपर्क किया।
मैथिव्ज़ के अमरीका में इस्राईल के एक जाने माने हीरे के कारोबारी से संबंध थे, धीरे धीरे उसने जुबैर का परिचय ज़ायोनी व्यवसायियों और हस्तियों से करवाना शुरू कर दिया।
1998 में एफ़बीआई द्वारा की गई पूछताछ में मैथिव्ज़ ने रहस्योद्घाटन किया कि मोसाद के एक अधिकारी से जुबैर की पहली मुलाक़ात हुई थी।
उस समय तक जुबैर ज़ायोनी व्यवसायियों के भारी क़र्ज़ के बोझ के नीचे दब चुके थे, इसलिए उनके पास मोसाद के साथ सहयोग करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं था। प्राप्त सुबूतों के अनुसार, अमरीका स्थित सऊदी दूतावास में कार्य करने तक जुबैर की समस्त गतिविधियों पर मोसाद का कंट्रोल हो चुका था।
इसके बाद से मोसाद की सीढ़ियों पर चढ़कर आदिल जुबैर सऊदी दूतावास में प्रवक्ता बन गए और उसके बाद राजदूत के पद तक पहुंच गए।
ग़ौरतलब है कि आदिल अल-जुबैर सऊदी अरब में शाही परिवार से बाहर के पहले ऐसे व्यक्ति हैं जो विदेश मंत्रालय का पद संभाल रहे हैं और यह सब मोसाद की सेवा का ही फल है जो उन्हें मिल रहा है।