आईआरजीसी के कमांडर मेजर जनरल मोहम्मद अली जाफ़री ने एक बयान जारी करके कहा है कि आईआरजीसी ईरान की सीमाओं की रक्षा के लिए पहले से अधिक संकल्पित है और हम दुश्मन से अपने शहीदों के ख़ून का बदला ज़रूर लेंगे।
लेबनान के इस्लामी प्रतिरोधी संगठन हिज़्बुल्लाह ने भी इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए इस्राईल और अमरीका पर इस हमले में शामिल तकफ़ीरी तत्वों के समर्थन का आरोप लगाया है।
हिज़्बुल्लाह के बयान में कहा गया है कि इस हमले से स्पष्ट हो गया है कि अमरीका और इस्राईल किस तरह से संगठित आतंकवाद का नेतृत्व कर रहे हैं।
आतंकवादी गुट जैशुल अद्ल ने हमले की ज़िम्मेदारी स्वीकार की है, हालांकि ईरान की इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने कहा है कि इस हमले में लिप्त तत्व निश्चित रूप से क्षेत्रीय एवं ग़ैर क्षेत्रीय देशों की ख़ुफ़िया एजेंसियों से जुड़े रहे होंगे।
इस हमले में शामिल आतंकवादी गुट की स्थापना पाकिस्तान स्थित आतंकवादी गुट जुन्दुल्लाह के सदस्यों ने 2012 में की थी।
आतंकवादी गुट जुन्दुल्लाह के सरग़ना अब्दुल मालिक रीगी को पकड़कर और फिर फांसी पर चढ़ाकर ईरान ने 2010 में इस गुट को ख़त्म कर दिया था। इस गुट की कोख से जन्म लेने वाले जैशुल अद्ल गुट को भी ईरान उसी की तरह शीघ्र ही नष्ट कर देगा।
ईरान के विदेश मंत्रालय ने भी कहा है कि ईरान की सेना और ख़ुफ़िया एजेंसियों के सपूत इस हमले में मारे गए शहीदों के ख़ून का बदला लेंगे।
इससे पहले ईरान के दक्षिण पूरब और दक्षिण पश्चिमी भागों में होने वाले आतंकवादी हमलों के लिंक सऊदी अरब और उसके कुछ सहयोगी देशों से जुड़े रहे हैं और यह हमला सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की पाकिस्तान यात्रा से ठीक पहले हुआ है।
सऊदी अरब ईरान-पाकिस्तान सीमा पर सक्रिय आतंकवादी गुटों को धन उपलब्ध कराता रहा है।
सऊदी क्राउन प्रिंस ईरान विरोधी अपनी नीतियों के लिए पहचान बना चुके हैं और वह युद्ध को ईरान की सीमाओं के भीतर लाने का दावा भी कर चुके हैं।
ईरान की दुश्मनी में आले सऊद शासन इतना अंधा हो चुका है कि उसने फ़िलिस्तीनियों के मौलिक अधिकारों की ओर से आंखें मूंदकर इस्राईल से गठजोड़ कर लिया है।
रियाज़ को विश्व भर में तकफ़ीरी आतंकवाद का वित्त पोषक माना जाता है, तकफ़ीरी आतंकवाद वहाबी विचारधारा से प्रभावित है, जिसे सऊदी अरब में आधिकारिक धार्मिक विचारधारा के रूप में मान्यता प्राप्त है।
अब अगर सऊदी अरब और इस्राईल मिलकर ईरानी हितों को इसी तरह निशाना बनाते रहेंगे, तो निश्चित रूप से ईरान दोनों को सबक़ सिखाने की भरपूर शक्ति रखता है।