वरिष्ठ नेता ने शुक्रवार को इस्लामी गणतंत्र ईरान के संस्थापक इमाम खुमैनी के हाथों पर वायु सेना द्वारा आज्ञापालन की प्रतिज्ञा की 40वीं वर्षगांठ वायु सेना के कमांडरों और वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों से भेंट में यह बात की।
वरिष्ठ नेता ने कहा कि जिन देशों में क्रांति आयी हैं वहां क्रांति की सालगिरह का जश्न, कुछ लोगों के सामने सैन्य परेड तक सीमित हो गया है लेकिन ईरान में चालीस वर्षों से जनता पूरे देश में सड़कों पर आती है और क्रांति की राह को जारी रखने पर बल देती है जो निश्चित रूप से क्रांति का एक चमत्कार है और इसे पूरी शक्ति के साथ जारी रहना चाहिए। वास्तव में ईरान में इस्लामी क्रांति की सफलता के बाद , अमरीका को ईरान में अपने हितों के लिए खरा महसूस हो गया था इसी लिए उसने राजनीतिक व आर्थिक दबाव , प्रतिबंध, युद्ध , आतंकवाद और ईरान में आतंकवादी हमलों में सहयोग करके , इस्लामी क्रांति के मार्ग में हमेशा बाधा उत्पन्न करने की कोशिश की है लेकिन सचेत जनता की वजह से हमेशा उसके षडयंत्र विफल रहे हैं और हमेशा ईरानी जनता, 11 फरवरी को अमरीकी षडयंत्रों की पराजय की घोषणा करती है और यह विजय दिन प्रतिदिन अमरीकी नेताओं की तिलमिलाहट को बढ़ा रही है और वह ईरानी जनता का अपमान करने लगे हैं। इस संदर्भ में वरिष्ठ नेता कहते हैं कि अमरीकी नेता ईरानी जनता का अपमान करके यह पूछते हैं कि ईरानी क्यों, अमरीका मुर्दाबाद का नारा लगाते हैं, तो अमरीकी अधिकारियों के जवाब हम कहेंगे कि कि हमें अमरीका जनता से कोई समस्या नहीं और अमरीका मुर्दाबाद का मतलब अमरीकी नेता, मुर्दाबाद है जैसा कि आजकल अमरीका मुर्दाबाद का मतलब ट्रम्प मुर्दाबाद , बोल्टन मुर्दाबादा, पोम्पियो मुर्दाबाद है और जब तक अमरीकी सरकार , दुष्टता, हस्तक्षेप , धूर्तता, नीचता करती रहेगी, ईरानी जनता " अमरीका मुर्दाबाद" का नारा लगाना नहीं छोड़ेगी।