समाचार एजेंसी फ़ार्स के अनुसार, माइक पोम्पियो ने "वॉशिंग्टन फ़्री बेकन" वेबसाइट से इंटरव्यू में इस निराधार दावे को दोहराते हुए कि ईरान का अंतरिक्ष में सैटलाइट भेजने का कार्यक्रम सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव नंबर 2231 का उल्लंघन है, कहा कि ईरान का अंतरिक्ष में सैटलाइट भेजने का कार्यक्रम वास्तव में परमाणु वॉरहेड्स ले जाने वाले आधुनिक मीज़ाईल के टेस्ट को जारी रखने के लिए है।
अमरीकी विदेश मंत्री ने कहा कि दुनिया को इस क़दम का विरोध करना चाहिए।
अमरीका ने यह दावा ऐसी स्थिति में किया है कि वह और उसके कुछ घटक आधुनिक प्रौद्योगिकी में एकाधिकार चाहते हैं।
जैसा कि ईरानी विदेश मंत्री जवाद ज़रीफ़ ने 3 जनवरी को अमरीका के इस दावे पर कि ईरान ने सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2231 का उल्लंघन किया है, कहा कि वॉशिंग्टन ईरान पर उस प्रस्ताव के उल्लंघन करने का इल्ज़ाम लगा रहा है जिसका ख़ुद उसने उल्लंघन किया है।
ईरानी विदेश मंत्री ने इस बात का उल्लेख करते हुए कि पोम्पियो से किसी और चीज़ की क्या उम्मीद की जा सकती है जब उन्हें जेसीपीओए ही समझ में नहीं आया, कहा कि जो लोग परमाणु समझौते जेसीपीओए से अवगत हैं, उन्हें पता है कि ईरान का सैटेलाइट कैरियर को भेजना और मीज़ाईल टेस्ट करना सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव नंबर 2231 का उल्लंघन नहीं है।
जवाद ज़रीफ़ ने इससे पहले इस बात की व्याख्या करते हुए कि प्रस्ताव 2231 में ईरान से सिर्फ़ यह मांग की गयी है कि वह परमाणु वॉरहेड्स ले जाने वाले मीज़ाईल न बनाए, कहा था कि ईरान के पास सैन्य परमाणु कार्यक्रम नहीं है।
उधर अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी आईएईए अब तक 13 रिपोर्टों में इस बात की पुष्टि कर चुकी है कि ईरान परमाणु समझौते जेसीपीओए की पूरी तरह पाबंदी कर रहा है।
अमरीकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प ने 8 मई को परमाणु समझौते जेसीपीओए का उल्लंघन करते हुए, इस समझौते से अमरीका के निकलने और ईरान के ख़िलाफ़ परमाणु पाबंदियों को फिर से लगाने का एलान किया। ट्रम्प के इस क़दम की न सिर्फ़ अमरीका के भीतर बल्कि पूरी दुनिया में आलोचना हुयी।