इस्लामी मामलों और धार्मिक प्रचार के मंत्री अब्दुल्लतीफ़ बिन अब्दुल अज़ीज़ आले शैख़ ने चेतावनी दी कि बहुत से लोग जो उपद्रव और उथल पुथल को पसंद करते हैं वह क्रांति का निमंत्रण देते हैं ताकि सत्ता उनके हाथ में पहुंच जाए। आले शैख़ ने राजधानी रियाज़ में धार्मिक प्रचारकों को संबोधित करते हुए अपनी चिंताएं बयान कीं। उनका कहना था कि अरब जगत के कई देशों में अरब स्प्रिंग के नाम से जो हंगामें हुए वह क्रान्ति नहीं है यह तो देश को ध्वस्त करने वाले हंगामें हैं और इन हंगामों के पीछे लक्ष्य सत्ता को हथियाना है। क्रांतियों के नाम से यह ज़हर है जो फैलाया जा रहा है और जो अरब मुसलमानों को तबाह कर रहा है और देशों को ध्वस्त कर रहा है। यह सब कुछ भ्रष्ट प्रचारकों की वजह से हो रहा है जो लोगों को उकसाते हैं और सत्ता पर क़ब्ज़ा जमा लेने की कोशिश करते हैं।
वर्ष 2010 और 2011 में ट्यूनीशिया, मिस्र और लीबिया सहित अनेक देशों में उठने वाली क्रान्ति ने तानाशाही शासनों को उखाड़ फेंका जबकि अरब देशों के साथ मिलकर अमरीका ने इन क्रान्ति को नाकाम करने या सही उद्देश्य से भटकाने की कोशिश की। वहीं दूसरी ओर इन्हीं देशों अर्थात अमरीका और उसके घटकों ने हालात का फ़ायदा उठाते हुए सीरिया में हंगामा शुर करवा दिया और इसे क्रान्ति का नाम दे दिया। सीरिया में जो कुछ हुआ उसका अंजाम सबके सामने है मगर अब सऊदी अरब को यह डर सता रहा है कि यमन युद्ध के अंजाम, वरिष्ठ पत्रकार जमाल ख़ाशुक़जी की हत्या, अनेक देशों से संबंधों में तनाव जैसी समस्याओं से जूझ रहे सऊदी अरब में अगर जनता का संयम समाप्त हो गया तो रियाज़ सरकार के लिए हालात को काबू में कर पाना बहुत कठिन होगा।
यही कारण है कि सऊदी अरब क्रान्ति के नुक़सान गिनवा रहा है। सच्चाई यह है कि अरब देशों में बहुत से देश हैं जहां तानाशाही स्थापित है और इन तानाशाहों को पश्चिमी देशों का सपोर्ट मिलता है अतः वह अपने देश की जनता से नहीं डरते। वैसे अमरीका को भी अच्छी तरह पता है कि यह सरकारें उसके समर्थन पर टिकी हुई हैं। अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने साफ़ शब्दों और अपमानजनक स्वर में कहा कि यदि अमरीका का समर्थन न हो तो अरब सरकारें दो सप्ताह भी सत्ता में नहीं टिक पाएंगी।
इन हालात में तनाशाही व्यवस्थाएं बहुत डरी हुई है क्योंकि उन्हें अब यह डर सताने लगा है कि अमरीका अपने घटकों के संबंध में रवैया बदल रहा है। नई रणनीति के तहत अमरीका अपने घटकों के हितों को बड़ी आसानी से नज़रअंदाज़ कर देता है।