बाज़ारों और सड़कों पर रौनक़ लौट आई है और लोग अपनी ज़रूरत की चीख़ें ख़रीद रहे हैं।
सऊदी अरब और संयुक्त अरब इमारात ने इस महत्वपूर्ण शहर पर क़ब्ज़ा करने के लिए कई महीने तक भीषण बमबारी की, लेकिन यमनी सेना और अंसारुल्लाह आंदोलन के कड़े प्रतिरोध ने अतिक्रमणकारियों के इरादों पर पानी फेर दिया और वे युद्ध विराम पर मजबूर हो गए, जिसे 18 दिसम्बर को लागू किया गया।
युद्ध विराम के लागू होने से पहले सऊदी सैन्य गठबंधन प्रतिदिन सैकडों टन बम हुदैदा के नागरिकों के सिर पर बरसा रहे थे।
अब यह लोग युद्ध विराम से बहुत ख़ुश हैं। मेडिकल स्टोर चलाने वाले हुदैदा के नागरिक इब्राहीम हैदर का कहना है कि पांच महीने की भीषण बमबारी के बाद अब नागरिक शांति के माहौल में सुकून से सांस ले पा रहे हैं।
हैदर का कहना था कि शांति हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण है। युद्ध ने यहां चारो ओर तबाही मचा दी है और अब हम फिर से खड़े होने का प्रयास कर रहे हैं।
सऊदी गठबंधन ने मार्च 2015 में यमन पर हमले शुरू किए थे और उसी के बाद से मध्यपूर्व के इस ग़रीब देश की हवाई, ज़मीनी और समुद्री नाकाबंदी कर रखी है।
ऐसी स्थिति में बाहर से पहुंचने वाली सहायता सामग्री का 70 प्रतिशत भाग इसी बंदरगाह से होकर यमन की पीड़ित और भूखी जनता तक पहुंचता है