मध्य पूर्व में सऊदी अरब और यमन जनांदोलन अंसारुल्लाह के बीच जारी तनाव के बीच क्षेत्रीय समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं। सऊदी अरब की सुरक्षा को लेकर मिस्र ने मदद देने की पेशकश की है, जबकि संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की ओर से भी यमन में अंसारुल्लाह के खिलाफ सक्रिय बलों को दोबारा समर्थन देने की खबरें सामने आई हैं।
इस बीच, सऊदी अरब के नज्रान क्षेत्र में एक हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें चालक दल के दोनों सदस्यों की मौत हो गई। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में हादसे की वजह स्पष्ट नहीं की गई है।
मिस्र की नेशनल डिफेंस काउंसिल ने सऊदी अरब में रक्षात्मक मिशन के लिए सैनिक भेजने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। मिस्र के सांसद मुस्तफा बकरी ने रविवार को यह जानकारी दी। अब इस प्रस्ताव पर संसद में विचार किया जाना है।
इससे पहले शनिवार को मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी ने कहा था कि सऊदी अरब की ओर से अनुरोध किए जाने पर उनका देश उसकी सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने को तैयार है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मिस्र की संभावित भूमिका रक्षा तक सीमित रहेगी, न कि हमले करने के लिए होगी।
मिस्र के राष्ट्रपति कार्यालय ने अपने बयान में सऊदी अरब के साथ एकजुटता जताई और उसकी सुरक्षा के लिए हर संभव सहायता देने की बात कही। बयान में क्षेत्रीय तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। हालांकि, सैनिकों की तैनाती को लेकर अभी औपचारिक घोषणा नहीं हुई है।
मिस्र के संविधान के अनुच्छेद 152 के अनुसार, विदेश में लड़ाकू मिशन के लिए सेना भेजने से पहले नेशनल डिफेंस काउंसिल से विचार-विमर्श और संसद के दो-तिहाई सदस्यों की मंजूरी जरूरी है।
यमन को लेकर सऊदी अरब और UAE के संबंधों में भी सहयोग के नए संकेत मिल रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, UAE ने दक्षिणी यमन में अंसारुल्लाह के खिलाफ लड़ रहे कुछ सरकारी समर्थक बलों को फिर से आर्थिक सहायता देने पर सहमति जताई है। इसके बदले सऊदी अरब इन बलों को हवाई सुरक्षा देने के लिए तैयार हुआ है।
इन बलों में जॉयंट ब्रिगेड्स भी शामिल हैं, जिन्हें पहले UAE से प्रशिक्षण और आर्थिक मदद मिलती रही है। UAE ने जनवरी में यमन में अपनी सैन्य भागीदारी समाप्त करने की घोषणा की थी।
इससे पहले यमन के भविष्य और उसके दक्षिणी इलाकों की स्थिति को लेकर सऊदी अरब और UAE के बीच मतभेद सामने आए थे। अब क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच दोनों देशों के बीच फिर से सहयोग की संभावनाएं दिखाई दे रही हैं।
मिस्र की संभावित सैन्य तैनाती और सऊदी अरब-UAE के बीच उभरता सहयोग यमन से जुड़े संघर्ष को नया क्षेत्रीय आयाम दे सकता है। हालांकि, मिस्र के सैनिकों की तैनाती पर अंतिम फैसला, UAE की सहायता का वास्तविक दायरा और दोनों खाड़ी देशों के बीच सहयोग की आगे की दिशा अभी स्पष्ट नहीं है।
फिलहाल, क्षेत्र में कूटनीतिक प्रयासों और सुरक्षा संबंधी फैसलों पर नजर बनी हुई है।
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