विदेशमंत्री जवाद ज़रीफ ने अपनी ट्विट में वास्तव में राष्ट्रपति रूहानी के उस भाषण की ओर संकेत किया है जो उन्होंने तेहरान में छे एशियाई देशों के संसद सभापतियों के सम्मेलन में दिया था।
शनिवार को आयोजित होने वाले इस सम्मेलन का नारा, आतंकवाद के विरुद्ध संघर्ष था। यह सम्मेलन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान का केन्द्र रहा किंतु ज़ायोनियों ने इस पर विशेष रूप से ध्यान दिया और इस्राईली समाचार पत्र " यरुश्लम पोस्ट ने लिखा कि ईरान ने एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की मेज़बानी द्वारा, अमरीका और उसके घटकों के एकांतवास को दर्शा कर क्षेत्र और उस से आगे अपने प्रभाव में वृद्धि को सिद्ध कर दिया है। इस इस्राईली समाचार पत्र के अनुसार , रूस, ईरान, चीन, तर्की और पाकिस्तान के बीच बढ़ते संबंध, मध्य पूर्व और विश्व के बारे में अमरीकी नीतियों के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं।
वास्तविकता यह है कि अमरीका का अतीत , उसकी स्वाधीनता के समय से लेकर अब तक पूरी दुनिया में युद्ध, रक्तपात और झगड़ों से भरा हुआ है। इस लिए उससे सार्थक भूमिका की आशा नहीं रखी जा सकती। इस लिए क्षेत्रीय समस्याओं का सब से उचित समाधान यह है कि क्षेत्र और क्षेत्रीय देश शक्तिशाली और सक्षम हों और अपनी समस्याओं का निवारण एक दूसरे के सहयोग से स्वंय करें। ईरान की नज़र में क्षेत्र की सुरक्षा, को क्षेत्रीय देशों के संयुक्त हितों के आधार पर परिभाषित किया जाना चाहिए ताकि विदेशी शक्तियों के हस्तक्षेप का रास्ता बंद किया जा सके।