तुर्की के राष्ट्रपति फ्रांस सरकार पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ व्यवहार को लेकर टिप्पणी एेसी दशा में कर रहे हैं कि अतीत में युरोपीय सरकारों ने विशेषकर फ्रांस और जर्मनी ने हमेशा प्रदर्शनकारियों के प्रति तुर्की के व्यवहार की आलोचना की है। इन हालात में एेसा लगता है कि प्रदर्शनकारियों के संदर्भ में न तुर्की का व्यवहार उचित है न फ्रांस का। फ्रांस में जो कुछ हो रहा है उससे एक बार फिर यह स्पष्ट हो गया कि पश्चिमी सरकारें अन्य देशों पर मानवाधिकारों और प्रजातंत्र को लेकर खूब टिप्पणी करती हैं किंतु स्वंय जब उनकी बारी आती है तो स्वंय किसी भी प्रकार के उल्लंघन से चूकती नहीं। तुर्की के राष्ट्रपति द्वारा फ्रांस की आलोचना पर इस देश ने प्रतिक्रिया प्रकट की है और अन्करा सरकार के विरुद्ध एक बयान जारी तुर्की में मानवाधिकारों के हनन का उल्लेख किया है।
कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि फ्रासं की दमन कारी नीतियों की अर्दोगान की ओर से आलोचना यह दर्शाती है कि युरोपीय सरकारें भी मानवाधिकार और स्वतंत्रता के सिद्धान्तों के प्रति कटिबद्ध नहीं हैं लेकिन इन हालात में अर्दोगान ने जो फ्रांस की आलोचना की है वह वास्तव में सन 2011 से अब तक युरोपीय सरकारों की और से तुर्की सरकार की आलोचना पर बदले की कार्यवाही मात्र है।