5 दिसंबर 2018 - 16:58
निश्चित विजय अमेरिका से लड़ कर ही हासिल की जा सकती हैः राष्ट्रपति रूहानी

रोचक बिन्दु यह है कि ईरान का मिसाइल कार्यक्रम पूरी तरह रक्षात्मक है और वह किसी प्रकार सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव नंबर 2231 का उल्लंघन नहीं है।

अमेरिका ने ईरान पर दबाव डालने का नया क्रम आरंभ कर दिया है। इस बार उसने ईरान के मिसाइल कार्यक्रम को बहाना बनाया है। ईरान के खिलाफ अमेरिका के इस कार्य में कुछ यूरोपीय देश भी उसकी हां में हां मिला रहे हैं।

विदेशमंत्री मोहम्मद जवाद ज़रीफ़ ने इस संबंध में कुछ पश्चिमी अधिकारियों के बयानों की प्रतिक्रिया में ट्वीट करके कहा है कि अमेरिका द्वारा सुरक्षा परिषद के दुरुपयोग से इस बात को नहीं छिपाया जा सकता कि वह अपने वचनों के प्रति कटिबद्ध नहीं रहता।

रोचक बिन्दु यह है कि ईरान का मिसाइल कार्यक्रम पूरी तरह रक्षात्मक है और वह किसी प्रकार सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव नंबर 2231 का उल्लंघन नहीं है।

अमेरिकी अधिकारी ईरान द्वारा प्रस्ताव नंबर 2231 के उल्लंघन की बात एसी स्थिति में कर रहे हैं जब 20 सितंबर को अमेरिकी विदेश मंत्रालय में ईरान एक्शन ग्रुप के मुखिया ब्रायन हुक ने स्वीकार किया था कि प्रस्ताव नंबर 2231 ने आधिकारिक रूप से ईरान के साथ होने वाले परमाणु समझौते की पुष्टि की और प्रस्ताव 1920 को निरस्त कर दिया और ईरान का केवल यह आह्वान किया गया है कि वह उन बैलेस्टिक मिसाइलों का परीक्षण न करे जो परमाणु वार हेड्स ले जा सकते हैं।

यहां इस बात का उल्लेख आवश्यक है कि ईरान का मिसाइल कार्यक्रम पूरी तरह पारदर्शी है और ईरान में न तो एसे मिसाइल बनाये जाते हैं और न बनायेंगे जो परमाणु वार हेड्स ले जा सकें। जानकार हल्कों का मानना है कि जब ईरानी तेल की बिक्री को शून्य तक पहुंचा देने की ट्रंप और अमेरिकी अधिकारियों की धमकी का कोई विशेष प्रभाव नहीं हुआ और वह विफल हो गयी तो ईरान पर दबाव डालने, अपनी विफलता को छिपाने और इस वास्तविकता से आम जनमत का ध्यान हटाने के लिए अमेरिकी अधिकारियों ने ईरान के मिसाइल कार्यक्रम को बहाना बना लिया।

रोचक बिन्दु यह है कि कुछ यूरोपीय अधिकारियों की हां में हां मिलाने के बावजूद भी अमेरिका अपने लक्ष्यों को नहीं साध सकता। अभी मंगलवार को ईरान के राष्ट्रपति डाक्टर हसन रूहानी ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि ईरानी राष्ट्र ने न तो दुश्मन के सामने घुटना टेका है और न ही टेकेगा। महान ईरानी राष्ट्र ने सिद्ध कर दिया है कि निश्चित विजय अमेरिका से लड़ कर ही हासिल की जा सकती है।