1 दिसंबर 2018 - 15:29
पूतिन का जेसीपीओए को बचाने पर दोबारा बल, रूसी स्वीफ़्ट के इस्तेमाल की संभावना

रूसी राष्ट्रपति व्लादमीर पूतिन ने शुक्रवार को अर्जेन्टीना में गुट-20 के शिखर सम्मेलन में परमाणु समझौते जेसीपीओए की रक्षा पर बल दिया।

पूतिन के शब्दों मेः जेसीपीओए से ईरान के परमाणु कार्यक्रम के बारे में तनाव की नई लहर की शुरुआत रूकने की संभावना पैदा होती है, इसलिए जेसीपीओए की रक्षा के लिए सभी ज़रूरी क़दम उठने चाहिए।

पूतिन इससे पहले भी अनेक बार जेसीपीओए को बचाने पर बल दे चुके हैं। जेसपीओए के सदस्य देश के रूप में रूस का मानना है कि जेसीपीओए क्षेत्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर शांति व सुरक्षा की दिशा में होने वाला समझौता और इसकी रक्षा अस्थिरता को रोकने की गैरंटी तथा परमाणु अप्रसार के परिप्रेक्ष्य में उठने वाला क़दम समझा जाता है। रूस ने जेसीपीओए से अमरीका के निकलने की सिर्फ़ शब्दों तक आलोचना को काफ़ी नहीं समझा बल्कि उसने ईरान के ख़िलाफ़ अमरीका की पाबंदियों का मुक़ाबला करने तथा ईरान को जेसीपीओए में बने रहने  के लिए प्ररित करने के लिए उपाय भी अपनाए हैं।

अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी में रूस के प्रतिनिधि मीख़ाईल ओलियानोफ़ के शब्दों मेः अमरीका ने ईरान के ख़िलाफ़ पाबंदी के ज़रिए ग़ुन्डा टैक्स लेने तथा डराने धमकाने की नीति अपनायी है। क्रेमलिन अधिकारी इस बात से अच्छी तरह अवगत हैं कि अमरीकी पाबंदियों की वजह से जेसीपीओए के लागू होने के मार्ग में दोहरी जटिलता आ गयी है।

ईरान को अपेक्षा है कि चीन और रूस की कार्यवाही इतनी प्रभावी होगी कि तेहरान को जेसीपीओए में बने रहने के लिए प्रेरणा मिलेगी। इसी परिप्रेक्ष्य में रूस के वरिष्ठ अधिकारी ईरान-रूस के बीच व्यापार और ऊर्जा के क्षेत्र में अहम समझौता होने यहां तक कि ईरान के रूसी स्वीफ़्ट को इस्तेमाल करने की संभावना जता रहे हैं।

जेसीपीओए से बाहर निकलने का अमरीका का व्यवहार दूसरे देशों को धौंस धमकी देने तथा उन पर अपनी इच्छा थोपने और एकपक्षवाद पर आधारित व्यवहार है। इसलिए अगर रूस सहित अंतर्राष्ट्रीय शक्तियां जेसीपीओए की रक्षा की इच्छुक हैं तो उनसे इस बात की अपेक्षा है कि वे अमरीका के ग़ुन्डागर्दी भरे व्यवहार का मुक़ाबला और ईरान के क़ानूनी अधिकार की रक्षा करेंगी। ख़ास कर इसलिए कि तेहरान ने बल दिया है कि वह उस समय तक जेसीपीओए के प्रति पाबंद रहेगा जब तक अमरीका की ग़ैर क़ानूनी पाबंदियों के असर कम होने सहित उसके हित हासिल होते रहेंगे।