25 नवंबर 2018 - 16:36
इस्लामी जगत की एकता, एकजुटता व समरसता पर इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता का बल

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने एकता, एकजुटता व समरसता को साज़िशों पर नियंत्रण के लिए इस्लामी जगत के समक्ष एकमात्र रास्ता बताया है।

आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई ने रविवार को देश के उच्चाधिकारियों, 32वीं इस्लामी एकता काॅन्फ़्रेंस में भाग लेने वालों और जनता के विभिन्न वर्गों से मुलाक़ात में धर्मगुरुओं और धार्मिक विद्वानों को संबोधित करते हुए कहा कि जितना अधिक संभव हो, क्षेत्र में इस्लामी चेतना और प्रतिरोध को मज़बूत बनाइये क्योंकि क्षेत्र को बचाने का एकमात्र मार्ग इसी विचार व भावना का फैलाव है। उन्होंने इस्लामी जागरूकता से बड़ी शक्तियों के भय की ओर संकेत करते हुए कहा कि जहां जहां इस्लाम, लोगों के दिल में समा गया, वहां वहां साम्राज्य को मार खानी पड़ी है और वह एक बार फिर इस क्षेत्र में इस्लामी जागरूकता से थप्पड़ खाएगा।

 

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने इस्लाम व क़ुरआन के अनुसरण के बजाए अमरीका के आदेशों का पालन करने वाले कुछ क्षेत्रीय देशों की तरफ़ इशारा करते हुए कहा कि अमरीका अपनी साम्राज्यवादी प्रवृत्ति के आधार पर इन देशों का अपमान करता है और जैसा कि सभी ने देखा, अमरीका के बड़बोले राष्ट्रपति ने सऊदी अधिकारियों को दुधारू गाय बताया। आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई ने इस प्रकार के अनादर को सऊदी अरब की जनता और क्षेत्र के मुस्लिम राष्ट्रों का अपमान बताया और कहा कि कुछ मुस्लिम देशों के अधिकारी, दो आपराधिक क़दमों के अंतर्गत फ़िलिस्तीन व यमन में अमरीका के साथ हो गए लेकिन निश्चित रूप से विजय फ़िलिस्तीन व यमन की जनता की ही होगी और इन मामलों में अमरीका व उसके पिछलग्गू पराजित होंगे।

 

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने क्षेत्र में अमरीका व ज़ायोनी शासन की शक्ति को पहले से कहीं अधिक कमज़ोर बताया और कहा कि कुछ साल पहले ज़ायोनी शासन, लेबनान के हिज़्बुल्लाह संगठन के मुक़ाबले में 33 दिन में पराजित हुआ था, उसके बाद फ़िलिस्तीनियों के मुक़ाबले में वह केवल 22 दिन टिक सका था और ग़ज़्ज़ा के अगले युद्ध में यह समय आठ दिन तक पहुंच गया था और पिछले हफ़्ते फ़िलिस्तीनी प्रतिरोध के मुक़ाबले में उसे दो ही दिन में पराजय हो गई और ये सारी बातें ज़ायोनी शासन के दिन प्रति दिन कमज़ोर पड़ते जाने को दर्शाती हैं। उन्होंने इसी तरह हर प्रकार की कठिनाइयों व दबाव के बावजूद ईरानी राष्ट्र के चालीस साल से जारी प्रतिरोध की तरफ़ इशारा करते हुए कहा कि अमरीका व ज़ायोनी शासन, ईरानी राष्ट्र को धमकाने का दुस्साहस करके बड़ी ग़लती कर रहे हैं।