20 नवंबर 2018 - 16:33
परमाणु समझौते का उल्लंघन यूरोपीय संघ की राजनीतिक प्रतिष्ठा को कुचलना हैः ब्रिटेन

राजनीतिक मामलों के एक पश्चिमी विशेषज्ञ मैथिव मेबन कहते हैं" यद्यपि अमेरिकी प्रतिबंधों के मुकाबले में यूरोपीय कानून बहुत सीमित और कमज़ोर हैं परंतु अब वे विश्व के थानेदार के रूप में अमेरिका को सहन नहीं करेंगे।

ब्रिटेन के विदेशमंत्री जेर्मी हन्ट ने तेहरान में ईरान की उच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव अली शमख़ानी और विदेशमंत्री मोहम्मद जवाद ज़रीफ़ से भेंटवार्ता की है। उन्होंने तेहरान में कहा कि अमेरिका की ओर से परमाणु समझौते के उल्लंघन का अर्थ यूरोपीय संघ की राजनीतिक प्रतिष्ठा व विश्वास को कुचलना है।

अली शमखानी ने भी इस भेंट में बहरैन और यमन में मानवाधिकारों का हनन करने वाले सऊदी अरब जैसे देश के हाथों ब्रिटेन द्वारा हथियारों की बिक्री की आलोचना करते हुए बल देकर कहा कि कुछ यूरोपीय देशों की ओर से अमेरिकी नीति का अनुसरण इन देशों के प्रति जहां ईरान और क्षेत्रीय जनता में नकारात्मक सोच उत्पन्न होने का कारण बनेगी वहीं क्षेत्रीय जनता इन देशों को अमेरिका, जायोनी शासन और क्षेत्र की रुढ़िवादी अरब सरकारों के अपराधों में भागीदार समझेगी।

जब से अमेरिका एक पक्षीय रूप से परमाणु समझौते से निकला है यूरोपीय देशों ने विभिन्न कारणों से ईरान के साथ व्यापारिक संबंध स्थापित करने पर बल दिया है परंतु उनके बयान अधिकतर बयानों की सीमा तक रहे हैं।

राजनीतिक मामलों के एक पश्चिमी विशेषज्ञ मैथिव मेबन कहते हैं" यद्यपि अमेरिकी प्रतिबंधों के मुकाबले में यूरोपीय कानून बहुत सीमित और कमज़ोर हैं परंतु अब वे विश्व के थानेदार के रूप में अमेरिका को सहन नहीं करेंगे।

वर्तमान समय में यूरोप की ओर से निर्णय लेने की प्रक्रिया धीमी गति से आगे बढ़ रही है। यूरोपीय संघ के सामने दो रास्ते हैं।

पहला रास्ता यह है कि वह स्वतंत्र ढंग से निर्णय ले जो इस बात का सूचक हो कि यह संघ अंतरराष्ट्रीय समझौतों के प्रति कटिबद्ध है जबकि दूसरा रास्ता अमेरिकी दबावों के सामने झुक जाना है और निश्चित रूप से इसका अंत केवल परमाणु समझौते पर नहीं होगा और भविष्य में यह यूरोपीय संघ के लिए बहुत महंगा पड़ेगा।

अमेरिका ने ईरान के खिलाफ जो प्रतिबंध लगाया है वह अंतरराष्ट्रीय कानूनों, राष्ट्रसंघ के घोषणा पत्र, मानवाधिकार प्रतिबद्धों और राष्ट्रसंघ की महासभा के प्रस्तावों के खिलाफ है।

इन प्रतिबंधों से सीधे रूप से ईरानी जनता को लक्ष्य बनाया गया है और अमेरिका के इस ग़ैर कानूनी रवइये से मुकाबले में यूरोपीय संघ द्वारा हर प्रकार का विलंब समस्त देशों के लिए हानिकारक सिद्ध होगा।

बहरहाल ईरान के उप विदेशमंत्री सैयद अब्बास इराक़ची के उस बयान को भी इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा सकता है जिसमें उन्होंने कहा है कि अगर अमेरिका यह सोचता है कि पश्चिम एशिया परमाणु समझौते के बिना अधिक सुरक्षित होगा तो वह भारी भूल में है।