16 अक्टूबर 2018 - 15:25
अगर शाह सलमान 1000 अरब डाॅलर दें तो ख़ाशुक़जी की हत्या का आरोप ईरान पर लगा दूंगाः ट्रम्प

सऊदी अरब के सरकार विरोधी पत्रकार जमाल ख़ाशुक़जी की हत्या या कम से कम लापता होने के बाद जहां सऊदी अरब पर विश्व स्तर पर दबाव बढ़ता जा रहा है, वहीं अंतर्राष्ट्रीय मीडिया में इस मामले की कवरेज के साथ ही सऊदी अरब का मज़ाक़ भी उड़ाया जा रहा है।

अरब मीडिया और सोशल मीडिया में लोगों ने ख़ाशुक़जी मामले में सऊदी अरब की खिल्ली उड़ाते हुए कहा है कि अमरीका इस मामले के बहाने सऊदी अरब को अधिक दुहना चाहता है। कई समाचारपत्रों ने इस संबंध में लेख और कार्टून छापे हैं जबकि सोशल पर इस संबंध में कई तरह की कैम्पेन चल रही है। एक इराक़ी समाचारपत्र ने एक कार्टून जैसा चित्र छापा है जिसमें सऊदी नरेश सलमान बिन अब्दुल अज़ीज़, अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प को एक फ़ाइल दिखा रहे हैं। ट्रम्प, सलमान से कह रहे हैं कि अगर और 500 अरब डाॅलर दे दो तो मैं कह दूंगा कि ख़ाशुक़जी की हत्या सऊदी कोन्सलेट से बाहर हुई है और अगर उसे 1000 अरब कर दो तो मैं ईरान पर ख़ाशुक़जी की हत्या का आरोप लगा दूंगा। सऊदी नरेश बड़े अपमानित ढंग से उत्तर में ट्रम्प से कह रहे हैं कि मैं 2000 अरब डाॅलर दूंगा, हिज़्बुल्लाह और हूसियों (अंसारुल्लाह) का नाम भी ईरान के साथ बढ़ा दो।

 

एक अन्य कार्टून में डोनल्ड ट्रम्प को मुसलमानों के सबसे पवित्र स्थल काबे के रूप में दिखाया गया है और सऊदी युवराज मुहम्मद बिन सलमान और अबू धाबी के युवराज मुहम्मद बिन ज़ायद उसका तवाफ़ (परिक्रमा) करते हुए कह रहे हैंः "तेल भी तुम्हारा, क़ुद्स भी तुम्हारा, इनमें तुम्हारा कोई सहभागी नहीं है।" काबे का तवाफ़ करते समय मुसलमान ईश्वर को संबोधित करते हुए कहते हैंः "सारा गुणगान तेरा है, सारी अनुकंपाएं तेरी हैं, शासननून समाचार एजेंसी ने भी अपने एक लेख में लिखा है कि सऊदी अरब अपने वादों पर सबसे अधिक प्रतिबद्ध रहने वाला देश है। अमरीकी कांग्रेस, ब्रिटिश संसद या इस्राईली कनेसट जो कुछ उसे डिक्टेट कर देते हैं वह उस पर कटिबद्ध रहता है, तो फिर अब उस पर इतना दबाव क्यों?  समाचार एजेंसी ने लिखा है कि सऊदी नरेश शाह सलमान और उनके बेटे युवराज मुहम्मद बिन सलमान उस संधि के प्रति कटिबद्ध हैं जो शाह अब्दुल अज़ीज़ ने वर्ष 1915 में अपने हाथ से ब्रिटेन के लिए लिखी थी जिसमें उन्होंने कहा था कि ब्रिटेन के आग्रह पर ग़रीब यहूदियों को फ़िलिस्तीन की धरती देने में उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। अब यह तो नहीं हो सकता न कि मुहम्मद बिन सलमान अपने दादा के वचन को तोड़ दें क्योंकि एेसी स्थिति में उन पर विश्वासघात का आरोप लगेगा!!! भी केवल तेरा ही है, तेरा कोई सहभागी नहीं है।"