16 अक्टूबर 2018 - 15:21
देशों को धमकी देना अमरीका की विदेश नीति हैः ईरान

संयुक्त राष्ट्र संघ में ईरान के स्थाई प्रतिनिधि ने कहा है कि दूसरे देशों को डराना और धमकाना, अमरीका की विदेश नीति का महत्वपूर्ण भाग बन चुका है।

संयुक्त राष्ट्र संघ में तैनात इस्लामी गणतंत्र ईरान के स्थाई प्रतिनिधि ग़ुलााम अली ख़ुशरू ने पिछले दिन संयुक्त राष्ट्र संघ के घोषणापत्र शीर्षक के अंतर्गत महासभा की छठीं कमेटी को संबोधित करते हुए कहा कि दूसरे देशों को डराना धमकाना, अमरीका की विदेश नीति का महत्वपूर्ण भाग बन चुका है जिससे संयुक्त राष्ट्र संघ कमज़ोर हो रहा है।

उन्होंने कहा कि अमरीका दूसरे देशों को धमकाने के नशे में धुत है जिसके कारण संयुक्त राष्ट्र संघ के घोषणापत्र के लागू होने पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

ईरानी प्रतिनिधि ने सुरक्षा परिषद के प्रतिबंधों की टिप्पणी करते हुए सचेत किया है कि एेस प्रतिबंधों का लागू होना, ग़लत सूचनाओं या भ्रांतियों के आधार पर नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सुरक्षा परिषद के वह प्रतिबंध जिनका लक्ष्य, राजनैतिक और विशेष लक्ष्यों के लिए हो वह पूर्णरूप से ग़ैर क़ानूनी हैं।

श्री ख़ुशरू ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र संघ में कुछ देश विशेष प्रस्ताव के हक़ में वोट देने पर दूसरे देशों को धमकियां दे रहे हैं और उन्हें सचेत कर रहे हैं कि वह उनकी वित्तीय सहायता बंद करेंगे, एेसी कार्यवाहियों के न केवल बुरे प्रभाव पड़ेंगे बल्कि इससे संयुक्त राष्ट्र संघ का घोषणापत्र भी प्रभावित होगा।

उन्होंने ईरान के परमाणु समझौते को सफल वार्ता और कूटनीति का नमूना क़रार देते हुए इस बात पर बल दिया कि अमरीका इस समझौते की समाप्ति के लिए नकारात्मक कार्यवाहियां कर रहा है विशेषकर वर्तमान अमरीकी प्रशासन की सरतोड़ कोशिश है कि परमाणु समझौते को समाप्त किया जाए।