अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने सामूहिक विनाश के हथियारों के प्रसार पर रोक के विषय पर आयोजित होने वाली सुरक्षा परिषद की बैठक की अध्यक्षता की कुर्सी पर बैठते ही ईरान के ख़िलाफ़ निराधार आरोपों की झड़ी लगा दी, अलबत्ता वही घिसे-पिटे और झूठ आरोप। इस बार जो चीज़ उनके लिए नई थी, वह यह थी कि उनके अलावा इस बैठक के सभी वक्ताओं ने उनकी आंखों में आंखें डाल कर बात की और स्पष्ट रूप से कहा कि ईरान के बारे में उनका रवैया, अमरीकी रवैये से अलग है। यह बैठक हालांकि सामूहिक विनाश के हथियारों के प्रसार पर रोक के नाम से आयोजित हो रही थी लेकिन जल्द ही पता चल गया कि इसका उद्देश्य ईरान के विरुद्ध एकमत तैयार करना था। ट्रम्प ने इस बैठक में दावा किया कि परमाणु समझौता एक बेकार समझौता था जिसने ईरान को परमाणु हथियार बनाने के मार्ग में आगे बढ़ने की अनुमति दी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ईरान, अमरीकी चुनाव में हस्तक्षेप का इरादा रखता है ताकि वे पुनः राष्ट्रपति न बन सकें।
जैसे ही ट्रम्प का भाषण पूरा हुआ वैसे ही बैठक में उपस्थिति लोगों ने उन पर ताबड़तोड़ हमले शुरू कर दिए। फ़्रान्स के राष्ट्रपति अमानोएल मैक्रां ने, जिनके ट्रम्प से निकट संबंध हैं, अमरीकी राष्ट्रपति की इच्छा के विपरीत उन्हें निराश करते हुए कहा कि परमाणु समझौता एक गंभीर समझौता है और सभी पक्षों को इसका पालन करना चाहिए।
मैक्रां ने तो ट्रम्प को निराश किया है लेकिन अमरीकी राष्ट्रपति को शायद अपने अंग्रेज़ दोस्तों और लंदन-वाॅशिंग्टन विशेष संबंधों से बहुत कुछ आशा था लेकिन उनकी ये आशा भी धराशायी हो गई क्योंकि ब्रिटेन की प्रधानमंत्री टेरीज़ा मे ने सुरक्षा परिषद की बैठक में स्पष्ट रूप से कह दिया कि ईरान ने जेसीपीओए के क्रियान्वयन के संबंध में अपनी सभी कटिबद्धताओं का पूरी तरह से पालन किया है।
टेरीज़ा मे के बाद सुरक्षा परिषद के अस्थायी सदस्य बोलिविया की बारी थी। इस देश के राष्ट्रपति इवो मोरालिस ने मानो ट्रम्प की बोलती बंद कर दी। उन्होंने कहा कि हम ईरान के ख़िलाफ़ अमरीका की एकपक्षीय नीतियों की निंदा करते हैं। इसी तरह परमाणु समझौते से अमरीका के बाहर निकलने, ईरान पर निराधार आरोप लगाने और उसके आंतरिक मामलों में अमरीका के हस्तक्षेप की भी भरपूर निंदा करते हैं। जब इवो मोरालिस भाषण दे रहे थे तो ट्रम्प उनके सामने पत्थर की मूर्ति की बिना हिले डुले चुपचाप बैठे हुए उन्हें तक रहे थे।
मोरालिस के बाद भाषण की बारी थी चीनी विदेश मंत्री वांग यी की। उन्होंने कूटनैतिक व क़ानूनी भाषणा में ट्रम्प और उनकी टीम की खिंचाई की। वांग यी ने कहा कि जेसीपीओए एक अत्यंत अहम अंतर्राष्ट्रीय समझौता है और सभी को उसका पालन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह समझौता, बहुपक्षीय प्रयासों का परिणाम और अहम समस्याओं के समाधान के लिए कूटनैतिक प्रयासों का एक सफल आदर्श है। चीनी विदेश मंत्री ने इसी तरह अमरीका की प्रतिबंध लगाने की नीति को भी आड़े हाथों लिया और दो टूक शब्दों में कहा कि सभी देशों को पहले की तरह ईरान के साथ सामान्य व्यापारिक और आर्थिक संबंध रखने का अधिकार है।
अंत में रूस के विदेश मंत्री सेर्गेई लावरोफ़ की नौबत थी और उन्हें अपने भाषण के आरंभ में ही कह दिया कि परमाणु समझौते को बाक़ी रहना चाहिए क्योंकि अगर यह समझौता बाक़ी न रहा तो मध्यपूर्व के क्षेत्र में अराजकता फैल सकती है। उन्होंने अमरीका के विरोधाभासी रवैये पर भी कटाक्ष किया और कहा कि जेसीपीओए से अमरीका का एकपक्षीय रूप से निकल जाना, ख़तरनाक हथियारों के प्रसार पर रोक की व्यवस्था के लिए हानिकारक है। अंत में उन्होंने बल देकर कहा कि ईरान अपनी कटिबद्धताओं का पालन कर रहा है और इसकी पुष्टि आईएईए ने भी की है।
बैठक का वातावरण ट्रम्प के लिए इतना असहनीय हो चुका था कि वे बीच ही में अपनी सीट से उठ कर चले गए और उन्होंने राष्ट्र संघ में अमरीकी दूत निकी हेली ने बैठक का संचालन अपने हाथ में लेने और दूसरों के तीर खाने के लिए अपने स्थान पर बिठा दिया लेकिन वे भी अमरीका की आलोचनाओं की बाढ़ को नहीं रोक सकीं। इस बैठक के बाद ईरानी विदेश मंत्री ने ट्वीट किया कि अमरीका एक बार फिर अलग-थलग पड़ गया। उन्होंने सवाल पूछा कि आख़िर अमरीका कब पाठ लेगा?